Kuwait New Law: कुवैत का नया फरमान, आतंकवाद और फंडिंग करने वालों को मिलेगी मौत की सजा
कुवैत सरकार ने आतंकवाद और उससे जुड़ी गतिविधियों को रोकने के लिए एक बेहद सख्त कानून लागू किया है। 16 मार्च 2026 को कुवैत के आधिकारिक गैजेट ‘Kuwait Al-Youm’ के एक विशेष अंक में Decree-Law No. 47/2026 प्रकाशित किया गया है। यह नया कानून आतंकवाद से जुड़े मामलों में सख्त सजा तय करता है और यह गैजेट में प्रकाशित होने के साथ ही प्रभावी हो गया है। कुवैत में काम करने वाले प्रवासियों और आम नागरिकों के लिए इस नए नियम की जानकारी होना बहुत जरूरी है।
नए कानून के तहत सजा के क्या प्रावधान हैं?
इस नए डिक्री-कानून के तहत आतंकवाद फैलाने वालों और उन्हें सपोर्ट करने वालों के लिए कड़ी सजा का ऐलान किया गया है। कुवैत प्रशासन ने साफ किया है कि देश की सुरक्षा को लेकर कोई रियायत नहीं बरती जाएगी।
- मौत की सजा: अगर किसी आतंकी गतिविधि के कारण किसी भी व्यक्ति की जान जाती है, तो दोषियों को मौत की सजा या आजीवन कारावास दिया जाएगा।
- संगठन बनाने पर सजा: कोई भी व्यक्ति जो आतंकी समूह बनाता है या उसका नेतृत्व करता है, उसे कम से कम 10 साल की कठोर जेल की सजा काटनी होगी। इसमें शामिल होने वालों पर भी भारी जुर्माना और जेल का प्रावधान है।
- संपत्ति जब्त: आधिकारिक ‘Terrorist Lists’ में शामिल व्यक्तियों या संस्थाओं की संपत्ति और बैंक खातों को तुरंत फ्रीज या कुर्क करने का पूरा अधिकार अधिकारियों को दिया गया है।
सोशल मीडिया और पैसों के लेनदेन पर निगरानी
कुवैत का गृह मंत्रालय (Ministry of Interior) और पब्लिक प्रॉसिक्यूशन अब ऐसे मामलों की सख्ती से जांच करेगा। इसके अलावा, आम जनता और प्रवासियों को सोशल मीडिया के इस्तेमाल में भी विशेष सावधानी बरतनी होगी। नए नियम के अनुसार सोशल मीडिया या किसी भी अन्य संचार माध्यम से आतंकवादी विचारधारा को बढ़ावा देना अब गंभीर अपराध है।
आतंकवाद के लिए सीधे या परोक्ष रूप से पैसे जुटाने या ट्रांसफर करने पर भी आजीवन कारावास और भारी जुर्माना लगाया जाएगा। सभी वित्तीय संस्थानों को किसी भी संदिग्ध ट्रांजैक्शन की रिपोर्ट तुरंत संबंधित अधिकारियों को देने का कानूनी निर्देश दिया गया है।
कुवैत का सेंट्रल बैंक और वित्तीय खुफिया इकाई ऐसे सभी वित्तीय लेनदेन पर पैनी नजर रखेंगे। अधिकारियों का कहना है कि यह नया कानून अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाया गया है ताकि चरमपंथी समूहों के वित्तीय स्रोत को पूरी तरह से काटा जा सके।




