अमेरिका-इजरायल और ईरान जंग से कच्चे तेल के दाम में भारी उछाल, खाड़ी में रहने वाले 91 लाख भारतीयों की बढ़ी मुश्किलें
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध ‘Operation Epic Fury’ को अब तीन हफ्ते होने वाले हैं। इस सैन्य संघर्ष की वजह से दुनिया भर के बाज़ार और ऊर्जा सप्लाई पर बहुत बुरा असर पड़ा है। कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँचने के बाद अब 100 डॉलर के करीब बनी हुई हैं। खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों भारतीयों के लिए यह स्थिति बहुत चिंताजनक हो गई है क्योंकि उनकी कमाई और सुरक्षा दोनों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक बाज़ार का क्या हाल है?
युद्ध शुरू होने के बाद तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा गया। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने बाज़ार को स्थिर करने के लिए 400 मिलियन बैरल कच्चा तेल जारी करने का फैसला लिया है। इसके बावजूद सप्लाई चेन पूरी तरह से टूट चुकी है। Strait of Hormuz, जहाँ से रोज़ाना 100 से ज़्यादा जहाज़ गुज़रते थे, वहां अब गिनती के जहाज़ ही चल पा रहे हैं। ज़्यादातर इंश्योरेंस कंपनियों ने इस इलाके में जहाजों को वार रिस्क कवर देने से मना कर दिया है जिससे समुद्री व्यापार ठप होने के कगार पर है।
भारतीय प्रवासियों और अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले मुख्य प्रभाव
खाड़ी देशों में लगभग 91 लाख भारतीय प्रवासी रहते हैं जो हर साल भारत में 50 अरब डॉलर की बड़ी रकम भेजते हैं। इस युद्ध और क्षेत्रीय अस्थिरता की वजह से यह कमाई अब सीधे तौर पर खतरे में आ गई है। भारत सरकार ने स्थिति को देखते हुए देश में रसोई ईंधन (LPG) की कमी को रोकने के लिए इमरजेंसी पावर का इस्तेमाल शुरू कर दिया है ताकि आम जनता को किल्लत का सामना न करना पड़े।
| विवरण | ताज़ा स्थिति (17 मार्च 2026) |
|---|---|
| कच्चा तेल (Crude Oil) | $100 प्रति बैरल |
| स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ ट्रैफिक | 3 जहाज़ प्रति दिन |
| भारतीय प्रवासियों की संख्या | 9.1 मिलियन |
| प्रभावित होने वाली विदेशी कमाई | $50 बिलियन |
| अमेरिकी सैनिकों के घायल होने की संख्या | लगभग 200 |
युद्ध के ताज़ा घटनाक्रम और सुरक्षा की स्थिति
पिछले 24 घंटों में बगदाद में अमेरिकी दूतावास पर ड्रोन हमला हुआ जिसे नाकाम कर दिया गया। वहीं यूएई की सेना ने भी नए ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों को रोकने की पुष्टि की है। ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोज्तबा खामेनेई के नेतृत्व में जवाबी कार्रवाई जारी है। एमनेस्टी इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक 28 फरवरी को ईरान के मीनाब में एक स्कूल पर हुए हमले में कई नागरिक मारे गए हैं जिसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन माना जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस संघर्ष को एक छोटा अभियान बताया है जबकि जमीनी हालात काफी गंभीर बने हुए हैं।




