Strait of Hormuz में छिड़ा तनाव, Donald Trump ने मांगी अंतरराष्ट्रीय मदद, $105 प्रति बैरल पहुंचा कच्चा तेल
Strait of Hormuz में बढ़ते संकट के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दुनिया के देशों से मदद की अपील की है। ट्रंप का प्रस्ताव है कि इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते को खुला रखने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय सैन्य गठबंधन बनाया जाए। हालांकि, इस प्रस्ताव पर अभी तक वैश्विक स्तर पर कोई मजबूत प्रतिक्रिया नहीं मिली है। जानकारों का मानना है कि अगर इस रास्ते से तेल की सप्लाई में रुकावट जारी रही, तो अंतरराष्ट्रीय दबाव और भी बढ़ सकता है।
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तेल की कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या असर होगा?
Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। वर्तमान तनाव की वजह से Brent Crude की कीमतें 105 डॉलर प्रति बैरल के पास पहुंच गई हैं, जिसमें पिछले कुछ दिनों में 40% से ज्यादा की तेजी देखी गई है। अगर यह रास्ता पूरी तरह बाधित होता है, तो दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान छू सकते हैं। UK सरकार ने पहले ही ऊर्जा की बढ़ती कीमतों से निपटने के लिए 70 मिलियन डॉलर के सहायता पैकेज की घोषणा कर दी है।
किस देश ने क्या कहा और सुरक्षा की नई शर्तें क्या हैं?
ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा है कि जो देश इस रास्ते से तेल प्राप्त करते हैं, उन्हें इसकी सुरक्षा का खर्च और जिम्मेदारी उठानी चाहिए। उन्होंने खास तौर पर China और NATO सहयोगियों की ओर इशारा किया है। हालांकि, यूरोपीय देशों और अन्य सहयोगियों की प्रतिक्रिया अलग-अलग रही है।
| देश या संस्था | वर्तमान स्टैंड और प्रतिक्रिया |
|---|---|
| Germany और Italy | सैन्य हस्तक्षेप में शामिल होने से साफ इनकार किया। |
| Japan और Australia | कानूनी अड़चनों का हवाला देकर मदद से पीछे हटे। |
| Iran | अमेरिकी दखल को गलत बताया और रास्ता बंद रखने की चेतावनी दी। |
| European Union | फिलहाल अपनी नौसेना के मिशन का दायरा बढ़ाने से मना किया। |
| America | 31st Marine Expeditionary Unit को क्षेत्र की ओर भेजा। |
क्या है भविष्य की रणनीति?
अमेरिका एक ‘Hormuz Coalition’ बनाने की कोशिश कर रहा है जो इस जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षा करेगी। दूसरी ओर, समुद्री खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, व्यापारिक यातायात लगभग ठप हो गया है और पिछले दो दिनों में केवल तीन जहाज ही बाहर निकल पाए हैं। स्थिति को संभालने के लिए अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने अपने आपातकालीन भंडार से 400 मिलियन बैरल तेल छोड़ने की योजना बनाई है ताकि बाजार में सप्लाई बनी रहे और कीमतों को नियंत्रित किया जा सके।




