Crude Oil Price Update: FY27 में 80 डॉलर रहेगा कच्चे तेल का भाव, भारत की जीडीपी पर पड़ेगा असर
पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण कच्चे तेल के दामों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। ICICI Bank की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2027 में कच्चे तेल की कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर टिक सकती हैं। यह कीमत पिछले साल के 66 डॉलर के औसत भाव से काफी ज्यादा है। हालांकि अभी के तनाव को देखते हुए ब्रेंट क्रूड 103 डॉलर के आसपास भी पहुंच गया है जिससे भारतीय बाजार में बेचैनी देखी जा रही है।
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वित्त वर्ष 2027 के लिए मुख्य आर्थिक आंकड़े
बैंक की रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि तेल की सप्लाई में आ रही रुकावटें एक महीने के भीतर ठीक नहीं होती हैं तो भारत की विकास दर कम हो सकती है। सरकार के लिए 80 डॉलर का भाव संभालना मुमकिन है लेकिन गिरता हुआ रुपया एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। मुख्य आंकड़ों को नीचे दी गई टेबल में समझा जा सकता है।
| विवरण | अनुमानित आंकड़े |
|---|---|
| वित्त वर्ष 2027 तेल का भाव | 80 डॉलर प्रति बैरल |
| पिछला औसत भाव | 66 डॉलर प्रति बैरल |
| हालिया उच्च स्तर (Peak) | 103 डॉलर प्रति बैरल |
| रुपये की कीमत (बनाम डॉलर) | 92 से 94 रुपये |
| अनुमानित जीडीपी ग्रोथ | 7 प्रतिशत |
तेल की सप्लाई और महंगाई पर ताजा अपडेट
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर आम आदमी की रसोई और खेती पर पड़ने की संभावना है। आर्थिक जानकारों का मानना है कि तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आने से महंगाई में 20 बेसिस पॉइंट तक की बढ़ोतरी हो सकती है। इसके अलावा कुछ और महत्वपूर्ण बातें निम्नलिखित हैं।
- Petroleum Ministry ने भरोसा दिलाया है कि देश में कच्चे तेल की पर्याप्त सप्लाई मौजूद है और पेट्रोल पंपों पर तेल की कोई कमी नहीं होगी।
- भारत का लगभग 60 प्रतिशत ऊर्जा आयात Strait of Hormuz से होकर आता है जहां फिलहाल तनाव की स्थिति बनी हुई है।
- संसद में विपक्ष ने ऊर्जा सुरक्षा और पश्चिम एशिया संकट को लेकर चर्चा की मांग की है।
- शेयर बाजार में भी तेल की कीमतों और वैश्विक अस्थिरता के कारण गिरावट दर्ज की गई है।
- खाद सब्सिडी पर भी इसका असर पड़ेगा जो इस साल 1.71 लाख करोड़ रुपये तय की गई है।




