सऊदी अरब और कतर के गृह मंत्रियों की बड़ी बैठक, मिसाइल हमलों के बाद खाड़ी देशों में अलर्ट जारी
सऊदी अरब के गृह मंत्री प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सऊद ने कतर के गृह मंत्री शेख खलीफा बिन हमद के साथ एक अहम बैठक की है। इस बातचीत का मुख्य मुद्दा खाड़ी क्षेत्र में बढ़ती सुरक्षा चुनौतियां और ईरान की तरफ से हो रहे हमले रहे। दोनों देशों के मंत्रियों ने गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल के तहत मिलकर इन खतरों का सामना करने पर सहमति जताई है। मौजूदा हालात को देखते हुए सऊदी अरब, कतर और बहरीन में सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह से अलर्ट पर हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने भी इन हमलों को रोकने के लिए एक प्रस्ताव पास किया है जिसके पक्ष में 13 वोट पड़े।
मिसाइल हमलों के बीच कैसा है सुरक्षा का माहौल?
गल्फ देशों में सुरक्षा व्यवस्था को काफी सख्त कर दिया गया है। हाल ही में सऊदी अरब के पूर्वी क्षेत्र में एयर डिफेंस ने दो ड्रोन्स को हवा में ही नष्ट कर दिया। इसके साथ ही कतर ने भी अपने इलाके में दो बैलिस्टिक मिसाइल, एक क्रूज मिसाइल और कई ड्रोन्स को मार गिराने की पुष्टि की है। बहरीन के अधिकारियों के आंकड़ों के मुताबिक, विवाद शुरू होने से अब तक कुल 115 मिसाइल और 191 ड्रोन्स को रोका जा चुका है। इन देशों ने साफ कर दिया है कि किसी एक सदस्य देश पर हमला सभी पर हमला माना जाएगा और इसका मिलकर जवाब दिया जाएगा।
प्रवासियों और नागरिकों के लिए क्या हैं जरूरी निर्देश
खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों और अन्य प्रवासियों के लिए सरकारों ने जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन का कहना है कि आंतरिक स्थिरता पूरी तरह कायम है और रोजमर्रा की सेवाएं चालू हैं।
- सुरक्षित जगह पर रहें: कतर और बहरीन में प्रशासन ने अलर्ट के दौरान लोगों को घर के अंदर रहने की सलाह दी है। कुछ इलाकों को एहतियात के तौर पर खाली भी कराया गया है। सैन्य ऑपरेशन्स की फोटो खींचने से मना किया गया है।
- राशन और पानी की व्यवस्था: कतर के गृह मंत्री ने साफ किया है कि देश में अगले 18 महीने तक का राशन और कई महीनों का पानी सुरक्षित है, इसलिए राशन जमा करने की कोई जरूरत नहीं है।
- फ्लाइट ऑपरेशन्स: UAE सिविल एविएशन ने बताया है कि उड़ानों की आवाजाही धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। इस महीने की शुरुआत में UAE एयरपोर्ट्स से 1.4 मिलियन यात्रियों ने सफर किया है।
- आधिकारिक जानकारी: प्रवासियों को सलाह दी गई है कि वे केवल सरकारी चैनलों और नेशनल वार्निंग सिस्टम पर आने वाले अलर्ट पर ही भरोसा करें।




