ईरान युद्ध से NATO देशों ने किया किनारा, ट्रम्प का बड़ा बयान, सऊदी अरब और UAE में अलर्ट जारी
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बड़ा बयान दिया है। ट्रम्प ने कहा है कि ज़्यादातर NATO देशों ने ईरान के खिलाफ युद्ध में शामिल होने से साफ़ इनकार कर दिया है। 28 फरवरी 2026 से अमेरिका और इज़राइल ईरान के खिलाफ ‘Operation Epic Fury’ चला रहे हैं। इसके जवाब में ईरान ने भी सऊदी अरब, UAE और कतर जैसे खाड़ी देशों की तरफ ड्रोन हमले तेज़ कर दिए हैं। इन हालातों को देखते हुए खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों की चिंता थोड़ी बढ़ गई है।
NATO देशों ने क्यों किया इनकार और ट्रम्प की चेतावनी
जर्मनी, ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा जैसे देशों ने ईरान युद्ध और Strait of Hormuz को सुरक्षित करने के अभियान में अपनी सेना भेजने से मना कर दिया है। ट्रम्प ने इसे एक लॉयल्टी टेस्ट बताया है और चेतावनी दी है कि ऐसा करने से गठबंधन का भविष्य खराब हो सकता है। कनाडा के रक्षा मंत्री और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने भी साफ़ किया है कि यह NATO का मिशन नहीं है। ट्रम्प का दावा है कि अमेरिका ने अकेले ही ईरान की सेना को भारी नुकसान पहुंचाया है और अब उन्हें मदद की खास ज़रूरत नहीं है।
सऊदी अरब और UAE पर क्या पड़ रहा असर
ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए खाड़ी देशों की तरफ कई ड्रोन दागे हैं। पिछले 24 घंटों में सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने पूर्वी क्षेत्र और रियाद के पास दर्जनों ड्रोन मार गिराए हैं। UAE और कतर में भी ऐसे ही हमलों की खबर आई है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सऊदी अरब ने रीजनल एयरपोर्ट्स और तेल रिफाइनरियों पर इमरजेंसी प्रोटोकॉल लागू कर दिया है। खाड़ी देशों में काम करने वाले सभी प्रवासियों को स्थानीय प्रशासन के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करने की सलाह दी जा रही है।
दुनिया भर में तेल की कीमतों पर बड़ा प्रभाव
युद्ध शुरू होने के बाद से कच्चे तेल की कीमतों में 40 से 50 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया है। ग्लोबल मार्केट में तेल की कीमत लगभग 105 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गई है। दुनिया का 20 प्रतिशत तेल Strait of Hormuz से होकर गुज़रता है जो अभी ज़्यादातर जहाज़ों के लिए बंद कर दिया गया है। हालात बिगड़ने के कारण समुद्री रास्तों पर भी अलर्ट जारी किया गया है जिसका असर कमर्शियल जहाज़ों की आवाजाही पर पड़ रहा है।




