ईरान के टॉप सिक्योरिटी चीफ अली लारीजानी की एयरस्ट्राइक में मौत, राष्ट्रपति ने लिया कड़े इंतकाम का संकल्प
ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव और बड़े नेता अली लारीजानी की एक एयरस्ट्राइक में मौत हो गई है। यह हमला ईरान की राजधानी तेहरान के पास 16 या 17 मार्च 2026 की रात को हुआ। इस हमले के लिए अमेरिका और इजरायल की सेनाओं को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन सहित कई शीर्ष नेताओं ने लारीजानी को श्रद्धांजलि दी है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों से कड़ा बदला लेने की बात कही है।
हमले में कौन-कौन मारे गए?
तेहरान के पास हुए इस सटीक एयरस्ट्राइक में अली लारीजानी के साथ उनके परिवार के सदस्य और करीबी भी मारे गए हैं।
- अली लारीजानी: ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (SNSC) के सचिव और बड़े रणनीतिकार।
- मोर्तेजा लारीजानी: अली लारीजानी के बेटे, जिनकी इसी हमले में जान गई।
- अलीरेज़ा बयात: SNSC के डिप्टी और लारीजानी के करीबी सहयोगी।
- गोलमरेज़ा सुलेमानी: बासिज पैरामिलिट्री फोर्स के कमांडर, जो एक अन्य संबंधित हमले में मारे गए।
इन सभी नेताओं का आधिकारिक अंतिम संस्कार 18 मार्च 2026 को तेहरान में किया जाएगा।
ईरान और इजरायल के आधिकारिक बयान
इस घटना के बाद दोनों देशों की तरफ से कड़ी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
- ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन: उन्होंने इस हत्या को एक कायरतापूर्ण कृत्य बताया और कहा कि हमलावरों से बहुत कड़ा इंतकाम लिया जाएगा।
- सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल: उन्होंने लारीजानी को शहीद का दर्जा दिया और उनके जीवन भर के संघर्ष की तारीफ की।
- इजरायल के रक्षा मंत्री (Israel Katz): उन्होंने लारीजानी को खत्म किए जाने की पुष्टि की और उन्हें ईरान के आतंक का मुख्य चेहरा बताया।
- बेंजामिन नेतन्याहू: उन्होंने कहा कि लारीजानी और सुलेमानी का मारा जाना ईरान को चलाने वाले गिरोह के लिए एक बड़ा झटका है।
ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि उनका प्रतिरोध का रास्ता आगे भी जारी रहेगा।
इस हमले का क्षेत्रीय असर क्या होगा?
फरवरी 2026 के अंत में पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामनेई की मौत की खबरों के बाद, अली लारीजानी ईरान की रक्षा और खुफिया नीतियों के लिए मुख्य निर्णयकर्ता बन गए थे। उनके मारे जाने से मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ गया है। ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) की सुरक्षा स्थिति अब युद्ध से पहले वाली स्थिति में नहीं लौटेगी। इससे खाड़ी देशों और दुनिया भर के व्यापार पर भी असर पड़ने की आशंका है।




