Egypt President El-Sisi का बड़ा ऐलान, खाड़ी देशों की सुरक्षा को बताया मिस्र का हिस्सा, अरब देशों से की ये अपील
18 मार्च 2026 को मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी ने खाड़ी देशों की सुरक्षा को लेकर एक अहम बयान दिया है. उन्होंने साफ कहा है कि मिस्र और खाड़ी देशों की राष्ट्रीय सुरक्षा एक-दूसरे से पूरी तरह जुड़ी हुई है. ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक के साथ फोन पर हुई बातचीत के दौरान सीसी ने इस बात पर जोर दिया कि खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा मिस्र की राष्ट्रीय सुरक्षा का ही एक अटूट हिस्सा है.
🗞️: UAE Mosque Rule: UAE सरकार का नया आदेश, सभी मस्जिदों में फज्र और मगरिब की नमाज़ में पढ़ी जाएगी कुनूत।
अरब देशों की सामूहिक सुरक्षा पर फोकस
मिस्र के राष्ट्रपति ने अरब देशों की सामूहिक सुरक्षा की नीति को जमीन पर उतारने की अपील की है. इसका मुख्य उद्देश्य बाहरी हमलों से अरब देशों की स्थिरता और संप्रभुता को बचाना है. मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलत्ती ने भी स्पष्ट किया है कि मिस्र इस समय क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC), जॉर्डन और इराक के साथ लगातार संपर्क में है.
खाड़ी देशों में काम करने वाले लाखों प्रवासियों और भारतीयों के लिए भी यह सुरक्षा समन्वय बहुत महत्वपूर्ण है. अगर इन देशों में शांति रहती है तो यहां काम करने वाले लोगों का रोजगार और जीवन सुरक्षित रहता है. साथ ही व्यापारिक रास्ते भी बिना किसी रुकावट के चलते रहते हैं.
व्यापार और मध्यस्थता पर क्या है अपडेट
क्षेत्र में चल रहे तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक कोशिशें तेज हो गई हैं. मिस्र ने अमेरिका और ईरान के बीच ओमान की मध्यस्थता का आधिकारिक रूप से समर्थन किया है ताकि मामले को बातचीत से सुलझाया जा सके. आर्थिक मोर्चे पर भी इस अस्थिरता का गहरा असर देखा जा रहा है. राष्ट्रपति अल-सीसी ने बताया कि मौजूदा क्षेत्रीय तनाव के कारण स्वेज नहर को लगभग 10 अरब डॉलर के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ा है.
- स्वेज नहर के रास्ते होने वाले व्यापार में भारी गिरावट दर्ज की गई है जिससे वैश्विक सप्लाई चेन पर असर पड़ा है.
- लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री जहाजों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है.
- 18 मार्च 2026 के आंकड़ों के अनुसार मिस्र के बैंकों में डॉलर के मुकाबले इजिप्टियन पाउंड के रेट में 0.08 EGP की मामूली कमी दर्ज की गई है.
- मिस्र के विदेश मंत्रालय ने यह भी साफ किया है कि एकजुटता के बावजूद अभी तक किसी भी अरब देश ने उनसे सैन्य मदद की कोई औपचारिक मांग नहीं की है.




