Saudi Arabia New Update: ईरान के हमलों पर भड़का सऊदी अरब, प्रिंस फैसल ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी
सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि खाड़ी देशों पर हो रहे हमलों का जवाब देने का हक सऊदी के पास सुरक्षित है। 18 मार्च 2026 को जारी बयान में प्रिंस फैसल ने साफ किया कि किंगडम अपनी सुरक्षा के लिए जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई भी कर सकता है। यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में तनाव चरम पर है और कतर जैसे देशों के तेल ठिकानों को निशाना बनाया गया है।
👉: Saudi Arabia Statement on Iran: ईरान के हमलों पर सऊदी का कड़ा रुख, सुरक्षा को लेकर दी चेतावनी।
ईरान के हमलों पर सऊदी अरब का क्या है रुख?
सऊदी अरब ने स्पष्ट किया है कि वह अपनी सीमाओं और ऊर्जा ठिकानों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है। प्रिंस फैसल ने यूएई के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान के साथ क्षेत्रीय सुरक्षा पर विस्तार से चर्चा की है। सऊदी अरब ने तेहरान को संदेश भेजा है कि वह कूटनीतिक समाधान चाहता है लेकिन हमलों के जारी रहने पर रियाद जवाबी हमला करने पर मजबूर होगा। खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों और अन्य प्रवासियों के लिए यह खबर सुरक्षा के लिहाज से काफी अहम मानी जा रही है।
खाड़ी क्षेत्र में मौजूदा हालात के मुख्य बिंदु
क्षेत्र में लगातार बिगड़ते हालात और हालिया घटनाओं को नीचे दी गई तालिका के माध्यम से समझा जा सकता है। सऊदी अरब अब इस मुद्दे पर अरब और इस्लामी देशों के साथ मिलकर रणनीति बना रहा है।
| प्रमुख घटना | विवरण और प्रभाव |
|---|---|
| कतर गैस प्लांट | रास लफान में स्थित मुख्य गैस प्लांट पर ईरानी हमला हुआ जिससे वहां आग लग गई। |
| आपातकालीन बैठक | रियाद में सुरक्षा और तनाव कम करने के लिए अरब विदेश मंत्रियों की बैठक बुलाई गई। |
| US बेस का उपयोग | सऊदी ने संकेत दिया है कि जरूरत पड़ने पर वह अमेरिकी सेना को अपने बेस इस्तेमाल करने दे सकता है। |
| ईरानी पक्ष का दावा | ईरान ने कहा कि उसने अमेरिकी सेना की लोकेशन बदलने की वजह से हमले किए। |
सऊदी अरब ने अभी तक किसी भी विदेशी सेना को ईरान पर हमला करने के लिए अपना हवाई क्षेत्र या जमीन इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी है। हालांकि किंगडम ने स्पष्ट किया है कि अगर ईरान की ओर से उकसावा जारी रहता है तो उसे अपनी रक्षा के लिए कड़े कदम उठाने होंगे। इस तनाव का असर खाड़ी देशों में काम करने वाले लाखों प्रवासियों की सुरक्षा और तेल की कीमतों पर भी पड़ सकता है।




