कतर का बड़ा फैसला, ईरानी राजनयिकों को 24 घंटे में देश छोड़ने का आदेश, रेड लाइन पार करने का लगाया आरोप
कतर और ईरान के बीच आपसी तनाव अब चरम पर पहुंच गया है। कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल-अंसारी ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा है कि ईरान ने सभी रेड लाइन पार कर दी हैं। यह तनाव तब शुरू हुआ जब कतर के प्रमुख ऊर्जा केंद्र Ras Laffan Industrial City पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए गए। इन हमलों की वजह से कतर के गैस उत्पादन संयंत्र को काफी नुकसान पहुंचा है। कतर ने इन हमलों को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सीधा खतरा करार दिया है।
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कतर ने ईरान के खिलाफ क्या कार्रवाई की है?
कतर ने अपनी संप्रभुता की सुरक्षा के लिए कड़े राजनयिक कदम उठाए हैं। कतर सरकार ने ईरानी दूतावास में तैनात मिलिट्री और सुरक्षा अधिकारियों को देश छोड़ने का आदेश दिया है। कतर में रहने वाले प्रवासियों और वहां काम करने वाले भारतीय नागरिकों के लिए यह एक बड़ी घटना है क्योंकि इसका असर वहां की सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है।
- ईरानी सुरक्षा अधिकारी को 24 घंटे के भीतर देश छोड़ने का अल्टीमेटम दिया गया है।
- दो ईरानी राजनयिकों और उनके पूरे स्टाफ को कतर से निष्कासित कर दिया गया है।
- कतर के फाइटर जेट्स ने अपनी हवाई सीमा का उल्लंघन करने वाले ईरानी विमानों को खदेड़ा है।
- कतर ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से प्रस्ताव 2817 को लागू करने की मांग की है।
ऊर्जा क्षेत्र और क्षेत्रीय शांति पर क्या असर होगा?
कतर ने इस स्थिति को बेहद खतरनाक बताया है और कहा है कि ईरान पूरे क्षेत्र को विनाश की ओर धकेल रहा है। प्रवक्ता माजिद अल-अंसारी ने स्पष्ट किया कि कतर की संप्रभुता और बुनियादी ढांचे पर होने वाले हमलों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हमलों का जवाब देने के लिए कतर की लीडरशिप ने सभी विकल्पों को खुला रखा है। कतर ने इसके साथ ही ईरान के South Pars गैस फील्ड पर हुए हमलों को भी गैर-जिम्मेदाराना बताया है क्योंकि इससे दुनिया भर की ऊर्जा सुरक्षा को खतरा पैदा होता है। खाड़ी क्षेत्र में काम करने वाले लाखों प्रवासियों के लिए यह घटनाक्रम चिंता का विषय बन गया है।





