Strait of Hormuz Security: ब्रिटेन और जापान समेत 6 देशों ने सुरक्षा का लिया जिम्मा, तेल की सप्लाई पर बड़ा फैसला
ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड और जापान ने एक साझा बयान जारी कर Strait of Hormuz में जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की घोषणा की है। ईरान के साथ बढ़ते तनाव और समुद्री व्यापार पर असर को देखते हुए इन देशों ने तेल सप्लाई को बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया है। 19 मार्च 2026 को जारी इस बयान में ऊर्जा बाजार को स्थिर करने के लिए रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार जारी करने की भी बात कही गई है।
ईरान का नया प्रस्ताव और अंतरराष्ट्रीय चिंताएं
ईरान Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों पर ट्रांजिट फीस और टैक्स लगाने की तैयारी कर रहा है। ईरान के अधिकारियों का कहना है कि समुद्री सुरक्षा बनाए रखने के मुआवजे के तौर पर यह शुल्क लिया जा सकता है। रूस ने चेतावनी दी है कि जो भी देश अमेरिका के नेतृत्व वाले सुरक्षा गठबंधन में शामिल होगा, उसे इस विवाद का हिस्सा माना जाएगा। अरब देशों ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से ईरान द्वारा जहाजों पर किए जा रहे हमलों को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने की मांग की है।
व्यापार और आम जनता पर पड़ने वाला असर
Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भारी गिरावट देखी गई है। 1 मार्च से 18 मार्च 2026 के बीच सामान ढोने वाले जहाजों की आवाजाही 95 प्रतिशत तक कम हुई है। इससे आने वाले दिनों में जरूरी चीजों की कीमतों पर असर पड़ सकता है।
| मुख्य देश | भूमिका और स्थिति |
|---|---|
| ब्रिटेन, फ्रांस, जापान | सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तैयार |
| ईरान | टैक्स लगाने और पाबंदी का विचार |
| यूरोपीय संघ (EU) | समुद्री मिशन के विस्तार पर चर्चा |
| रूस | गठबंधन में शामिल देशों को चेतावनी |
| सऊदी अरब और बहरीन | समुद्री रास्तों की सुरक्षा पर जोर |
ईरान का दावा है कि यह जलमार्ग पूरी तरह बंद नहीं है, लेकिन अमेरिका और इजरायल से जुड़े जहाजों के लिए इस रास्ते का इस्तेमाल मुश्किल होगा। यूरोपीय संघ भी अपने ‘Aspides’ नौसेना मिशन को बढ़ाने की योजना बना रहा है ताकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित न हो। खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासी भारतीयों के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका सीधा असर ईंधन की कीमतों और सप्लाई चेन पर पड़ेगा।




