Saudi Arabia New Update: सऊदी अरब और कुवैत के बीच बड़ी चर्चा, ईरान के हमलों को बताया क्षेत्र के लिए बड़ा खतरा
सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और कुवैत के अमीर के बीच फोन पर अहम बातचीत हुई है। इस चर्चा के दौरान खाड़ी देशों पर ईरान के बढ़ते हमलों और तेल ठिकानों को निशाना बनाने पर गहरी चिंता जताई गई। दोनों नेताओं ने साफ़ कहा कि ईरान की ये हरकतें पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता के लिए एक बड़ा खतरा हैं। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब खाड़ी के कई देशों में लगातार ड्रोन और मिसाइल हमले देखे जा रहे हैं।
ℹ️: Saudi Arabia और Kuwait के बीच हुई बड़ी बात, खाड़ी देशों की सुरक्षा के लिए उठाए जाएंगे कड़े कदम।
ईरान के हमलों से खाड़ी देशों में क्या हुआ?
19 मार्च 2026 को ईरान ने खाड़ी देशों पर ड्रोन और मिसाइलों से हमले तेज कर दिए हैं। इन हमलों से क्षेत्र के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुँचा है। कुवैत और सऊदी अरब की सेनाओं ने कई मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया, लेकिन कुछ जगहों पर नुकसान की खबरें आई हैं।
- कतर की गैस फैसिलिटी और यूएई के हबशान गैस स्टेशन को निशाना बनाया गया।
- सऊदी अरब के यानबू में स्थित रिफाइनरी पर ड्रोन हमला हुआ जिससे काम रोकना पड़ा।
- रियाद में मिसाइल के टुकड़े गिरने से चार लोग घायल हुए हैं।
- कुवैत ने अपनी सीमा में दाखिल हो रहे कई ईरानी ड्रोनों को मार गिराया है।
सऊदी अरब और अन्य देशों का क्या रुख है?
सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने बयान दिया है कि रियाद का धैर्य अब खत्म हो रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि अगर हमले नहीं रुके तो सऊदी अरब सैन्य कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा। रियाद में हुई एक बड़ी बैठक में कई मुस्लिम देशों ने ईरान की इन हरकतों की निंदा की है।
| देश का नाम | प्रभावित क्षेत्र | प्रमुख कार्रवाई |
|---|---|---|
| सऊदी अरब | Yanbu Refinery | मिसाइलें इंटरसेप्ट की गईं |
| कतर | Ras Laffan | ईरानी राजनयिकों को निकाला |
| यूएई | Habshan Facility | गैस ऑपरेशन बंद किया |
| कुवैत | Airspace | ड्रोन मार गिराए गए |
इस स्थिति का असर खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों पर भी पड़ सकता है क्योंकि सुरक्षा कारणों से कई जगहों पर अलर्ट जारी किया गया है। कतर ने ईरान के दूतावास से जुड़े अधिकारियों को 24 घंटे के भीतर देश छोड़ने का आदेश दिया है। खाड़ी सहयोग परिषद के देशों ने ईरान से अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का सम्मान करने की अपील की है।




