ईरान का बड़ा हमला, कुवैत में अमेरिकी बेस और इज़राइल के सैन्य ठिकानों पर मिसाइलों की बौछार
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने 20 मार्च 2026 को ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4’ के तहत कुवैत और इज़राइल में स्थित सैन्य ठिकानों पर भीषण हमले किए। यह कार्रवाई शुक्रवार को तड़के शुरू हुई जिसमें भारी मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। इस ऑपरेशन में कुवैत के अमेरिकी बेस और इज़राइल के सुरक्षा केंद्रों को काफी नुकसान पहुँचाने का दावा किया गया है।
हमले में किन सैन्य ठिकानों को बनाया गया निशाना?
ईरान की सेना ने कुवैत में स्थित Ali Al-Salem Base को मुख्य रूप से निशाना बनाया है। इस बेस का इस्तेमाल अमेरिकी सेना विमानों के रखरखाव और ड्रोन कमांड सेंटर के रूप में करती है। इसके अलावा Al-Wafa Base पर मौजूद मिसाइल डिफेंस रडार को भी ध्वस्त कर दिया गया। इज़राइल के कब्जे वाले इलाकों में Tel Aviv सहित मध्य और उत्तरी क्षेत्रों के एयर डिफेंस सिस्टम पर हमला किया गया। हमले की कुछ मुख्य जानकारी नीचे दी गई है:
| निशाना बनाया गया क्षेत्र | विशेष विवरण |
|---|---|
| Ali Al-Salem Base (Kuwait) | UAV कमांड और विमान हैंगर |
| Al-Wafa Base | अमेरिकी रडार और सैन्य टुकड़ियाँ |
| Tel Aviv | इजराइली सुरक्षा और सैन्य केंद्र |
| मिसाइल सिस्टम | Ghadr, Khorramshahr और Qiam |
| आधुनिक तकनीक | Kheibar Shekan और आत्मघाती ड्रोन |
| रणनीतिक लक्ष्य | सैटेलाइट सेंटर और एयर डिफेंस रडार |
ईरान के आधिकारिक बयान और हमलों का उद्देश्य
IRGC ने बयान जारी कर बताया कि 66वीं और 67वीं लहर के ये हमले शहीद Hajj Qassem Soleimani और अन्य शहीद कमांडरों की याद में किए गए हैं। ईरान ने चेतावनी दी है कि क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी और इज़राइली ठिकानों पर उसकी रणनीतिक बढ़त बनी रहेगी। ऑपरेशन में सॉलिड और लिक्विड फ्यूल वाली भारी बैलिस्टिक मिसाइलों का बड़े पैमाने पर प्रयोग हुआ। ईरान के अनुसार यह कार्रवाई क्षेत्रीय सुरक्षा और बुनियादी ढांचे पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए की गई है।




