Strait of Hormuz में जहाजों पर हमलों से बढ़ा तनाव, फिनलैंड और 20 देशों ने ईरान की कड़ी निंदा की
Strait of Hormuz और Persian Gulf में जहाजों पर हो रहे हमलों को लेकर फिनलैंड और 20 अन्य देशों ने एक साझा बयान जारी किया है। इन देशों ने ईरान द्वारा कमर्शियल जहाजों पर किए जा रहे हमलों की कड़ी निंदा की है। इस बयान में अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता जताई गई है। फिनलैंड के राष्ट्रपति Alexander Stubb ने भी इस सामूहिक कदम की पुष्टि की है और इसे वैश्विक शांति के लिए जरूरी बताया है।
किन देशों ने मिलकर जारी किया यह बयान और क्या हैं उनकी मुख्य मांगें?
इस बयान में United Kingdom, France, Germany, Italy, Bahrain, Japan, South Korea और Finland समेत कुल 21 देश शामिल हैं। इन देशों ने ईरान से अपनी आक्रामक सैन्य गतिविधियों को तुरंत रोकने की अपील की है। बयान में साफ तौर पर कहा गया है कि Strait of Hormuz को बंद करना या वहां निहत्थे जहाजों को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है।
- ईरान को ड्रोन और मिसाइल हमलों को तुरंत रोकना होगा।
- Strait of Hormuz में माइन बिछाने जैसी हरकतों पर रोक लगाने की मांग की गई है।
- UN Security Council के प्रस्ताव 2817 का पूरी तरह पालन करने को कहा गया है।
- समुद्री रास्तों की सुरक्षा के लिए ये देश जरूरी कदम उठाने के लिए तैयार हैं।
आम आदमी और ऊर्जा बाज़ार पर इस तनाव का क्या होगा प्रभाव?
Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति रास्तों में से एक है। यहां किसी भी तरह की रुकावट से पूरी दुनिया में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं। खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और वहां से होने वाले व्यापार पर भी इसका सीधा असर पड़ता है। स्थिति को संभालने के लिए International Energy Agency ने आपातकालीन तेल भंडार से तेल निकालने का फैसला किया है ताकि बाज़ार में कीमतों को स्थिर रखा जा सके।
यह साझा बयान ऐसे समय में आया है जब फरवरी के अंत से ही इस इलाके में तनाव बढ़ गया है। इन देशों ने स्पष्ट किया है कि अंतरराष्ट्रीय शिपिंग में दखल देना वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए खतरा है। सभी हस्ताक्षरकर्ता देशों ने सुरक्षित समुद्री यातायात सुनिश्चित करने के लिए अपना सहयोग देने की प्रतिबद्धता जताई है।




