अमेरिका ने ईरान के फंसे हुए तेल की बिक्री को दी मंजूरी, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर पड़ेगा असर
अमेरिका ने समुद्र में फंसे हुए ईरानी तेल की बिक्री के लिए एक खास और छोटी अवधि की मंजूरी जारी की है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के सचिव Scott Bessent ने बताया कि यह फैसला बाजार में तेल की सप्लाई बढ़ाने और कीमतों को काबू में रखने के लिए लिया गया है। इस अनुमति के जरिए लगभग 14 करोड़ बैरल तेल को ग्लोबल मार्केट में लाया जाएगा, जिससे ऊर्जा की वैश्विक जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
इस मंजूरी के तहत क्या नियम और शर्तें तय की गई हैं?
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) ने ‘जनरल लाइसेंस U’ जारी किया है। यह एक अस्थाई व्यवस्था है जो कुछ खास नियमों के दायरे में काम करेगी। इसकी मुख्य शर्तें नीचे दी गई टेबल में समझी जा सकती हैं:
| नियम | विवरण |
|---|---|
| वैधता अवधि | 19 अप्रैल 2026 तक (30 दिन का समय) |
| तेल की स्थिति | 20 मार्च 2026 तक जहाजों पर लोड हो चुका तेल |
| अनुमति की सीमा | केवल मौजूदा सप्लाई के लिए, नई खरीदारी पर रोक |
| शामिल सेवाएं | बीमा, शिपिंग, पंजीकरण और सुरक्षा प्रबंधन |
अमेरिका ने क्यों लिया यह फैसला और क्या होगा इसका प्रभाव?
अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि वर्तमान में प्रतिबंधित ईरानी तेल को चीन बहुत कम कीमतों पर जमा कर रहा है। Scott Bessent के अनुसार, अमेरिका इस तेल को बाजार में उतारकर वैश्विक कीमतों को कम रखना चाहता है। यह कदम ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ का हिस्सा माना जा रहा है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह तेल वायदा बाजार में हस्तक्षेप नहीं करेगी, बल्कि भौतिक रूप से कच्चे तेल की उपलब्धता बढ़ाएगी।
- ईरान को मिलने वाले राजस्व पर अमेरिका का सख्त दबाव बना रहेगा।
- यह मंजूरी उत्तर कोरिया, क्यूबा या यूक्रेन के रूसी कब्जे वाले क्षेत्रों पर लागू नहीं होगी।
- पिछले दो हफ्तों में यह तीसरी बार है जब अमेरिका ने तेल प्रतिबंधों में ढील दी है।
- ईरान ने बयान दिया है कि उसके पास अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए कोई अतिरिक्त कच्चा तेल मौजूद नहीं है।
इस फैसले से उन जहाजों को राहत मिलेगी जो लंबे समय से समुद्र में फंसे हुए थे। इसमें तेल के सुरक्षित हस्तांतरण के लिए बंकरिंग, पायलेटिंग और वर्गीकरण जैसी सेवाओं को भी छूट दी गई है ताकि किसी भी तरह की सुरक्षा चूक न हो।




