Strait of Hormuz में जहाजों पर हमले से दुनिया परेशान, फिनलैंड समेत 21 देशों ने ईरान को दी कड़ी चेतावनी
फिनलैंड और दुनिया के 20 अन्य देशों ने मिलकर Strait of Hormuz में कमर्शियल जहाजों पर हो रहे हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है। फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी दी कि उनका देश अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा बनाए रखने के लिए इस संयुक्त बयान में शामिल हो गया है। इन देशों ने ईरान से मांग की है कि वह मालवाहक जहाजों पर ड्रोन और मिसाइल हमले तुरंत रोके और इस समुद्री रास्ते को व्यापार के लिए सुरक्षित रखे।
ℹ: Saudi Arabia Defense: सऊदी अरब में बड़ा हमला नाकाम, सेना ने एक ही दिन में गिराए 51 दुश्मन ड्रोन।
Strait of Hormuz में बढ़ते तनाव पर क्या बोले अंतरराष्ट्रीय देश?
इन 21 देशों ने एक सुर में कहा है कि अंतरराष्ट्रीय शिपिंग में दखल देना और वैश्विक ऊर्जा सप्लाई को रोकना दुनिया की शांति के लिए बड़ा खतरा है। संयुक्त बयान में ईरान से आग्रह किया गया है कि वह समुद्री सुरंगें (mines) बिछाना और जहाजों को रोकने की कोशिशें बंद करे। देशों ने साफ किया कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के तहत जहाजों को बिना किसी रुकावट के आने-जाने की आजादी होनी चाहिए।
- ईरान से अंतरराष्ट्रीय कानून और सुरक्षा सिद्धांतों का पालन करने को कहा गया है।
- जहाजों पर हमलों और तेल-गैस ठिकानों को निशाना बनाने की आलोचना की गई है।
- तमाम देशों ने Strait of Hormuz से सुरक्षित पैसेज सुनिश्चित करने के लिए सहयोग की बात कही है।
शिपिंग पर हमलों का कितना पड़ा बुरा असर?
फरवरी के आखिर से शुरू हुए इन हमलों की वजह से इस इलाके में समुद्री व्यापार लगभग ठप हो गया है। डेटा के मुताबिक, मार्च के शुरुआती हफ्तों में इस रास्ते से गुजरने वाले मालवाहक जहाजों की संख्या में 95% की कमी आई है। इस स्थिति से निपटने के लिए कई अंतरराष्ट्रीय संगठन भी नजर बनाए हुए हैं।
| जानकारी का प्रकार | महत्वपूर्ण आंकड़े/विवरण |
|---|---|
| कुल हमला झेलने वाले जहाज | 23 कमर्शियल जहाज (11 तेल टैंकर शामिल) |
| शिपिंग ट्रैफिक में गिरावट | 95% (मार्च 1 से 19 के बीच) |
| खतरे का स्तर | Critical (JMIC द्वारा घोषित) |
| मुख्य शामिल देश | UK, France, Germany, Japan, Finland, Bahrain आदि |
भारतीयों और खाड़ी देशों के प्रवासियों पर क्या होगा असर?
Strait of Hormuz भारत के लिए तेल और गैस की सप्लाई का मुख्य रास्ता है। अगर यहाँ तनाव बढ़ता है, तो इससे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं जिसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा। खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों प्रवासियों के लिए भी यह चिंता का विषय है क्योंकि समुद्री व्यापार बाधित होने से जरूरी सामानों की सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ भारतीय झंडे वाले टैंकरों ने सुरक्षा के लिए ईरानी क्षेत्र के ‘सेफ कॉरिडोर’ का इस्तेमाल किया है, लेकिन वहां भी जोखिम बना हुआ है।




