Qatar Gas Field Danger: ईरान पर हमले से कतर के गैस प्लांट को खतरा, एक्सपर्ट ने भारत के लिए भी दी चेतावनी
एरियल वॉरफेयर एनालिस्ट और इतिहासकार टॉम कूपर ने ईरान के साउथ पार्स (South Pars) गैस फील्ड पर हुए हमलों की कड़ी आलोचना की है। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि ईरान के गैस फील्ड पर हमला करना समझदारी भरा फैसला नहीं है क्योंकि इससे कतर की ऊर्जा सुविधाओं पर जवाबी हमले शुरू हो सकते हैं। कूपर के अनुसार कतर के गैस इंफ्रास्ट्रक्चर पर किसी भी तरह का हमला पूरी दुनिया के लिए मुसीबत खड़ी कर सकता है।
कतर के गैस प्लांट पर हमले से क्या होगा नुकसान?
ईरान और कतर दुनिया का सबसे बड़ा नेचुरल गैस रिजर्व साझा करते हैं जिसे साउथ पार्स और नॉर्थ फील्ड के नाम से जाना जाता है। हालिया तनाव के दौरान कतर के Ras Laffan गैस कॉम्प्लेक्स को नुकसान पहुंचने की खबरें आई हैं। इससे कतर की LNG निर्यात क्षमता में 17% की कमी आई है। अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो कतर को सालाना 20 बिलियन डॉलर का राजस्व नुकसान हो सकता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान के पास गहरे दबे हुए इंफ्रास्ट्रक्चर की वजह से जवाबी हमला करने की पूरी क्षमता मौजूद है।
भारत और दुनिया पर इसका क्या असर पड़ेगा?
- भारत अपनी नेचुरल गैस और उर्वरक (fertilizers) की जरूरतों के लिए कतर पर बहुत ज्यादा निर्भर है।
- कतर से होने वाली सप्लाई में कोई भी बाधा भारत के कृषि और ऊर्जा क्षेत्र को प्रभावित करेगी।
- ग्लोबल मार्केट में गैस की कमी होने से यूरोप और एशिया के कई देशों में बिजली की कीमतें बढ़ सकती हैं।
- ईरान ने साफ चेतावनी दी है कि अगर उसके तेल और गैस ठिकानों को दोबारा निशाना बनाया गया तो वह कड़ा जवाब देगा।
- कुवैत और UAE जैसे अन्य खाड़ी देशों की रिफाइनरियों पर भी हमले का खतरा बना हुआ है।
तनाव बढ़ने के मुख्य कारण क्या हैं?
मार्च 2026 के मध्य में इजरायल ने ईरान के तेल और गैस ठिकानों पर हमला किया था। इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी देशों में मौजूद ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया जिसमें कतर का Ras Laffan प्लांट भी शामिल था। कतर के प्रधानमंत्री ने इन हमलों की निंदा करते हुए कहा है कि इससे आम जनता और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को बड़ा नुकसान पहुंच रहा है। फिलहाल अमेरिका की तरफ से भी ईरान को कतर के प्लांट पर हमला न करने की चेतावनी दी गई है।





