अमेरिका का ईरान पर बड़ा हमला, 8000 से ज्यादा सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना
अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। 21 मार्च 2026 को जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ईरान के भीतर 8000 से ज्यादा सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। इस युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी 2026 को हुई थी और अब हमलों की तीव्रता में भारी बढ़ोत्तरी देखी जा रही है। खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले भारतीयों और प्रवासियों के लिए यह स्थिति काफी चिंताजनक बनी हुई है क्योंकि इसका असर पड़ोसी देशों पर भी पड़ रहा है।
अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और राष्ट्रपति ट्रंप का बयान क्या है?
अमेरिकी रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने पुष्टि की है कि पेंटागन अपने ऑपरेशंस की रफ्तार बढ़ा रहा है। राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा कि अमेरिका का मुख्य लक्ष्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे फिलहाल युद्धविराम के पक्ष में नहीं हैं। इन हमलों में अमेरिका के घातक B-2 Stealth Bombers का इस्तेमाल किया गया है, जिन्होंने जमीन के काफी नीचे बने मिसाइल सेंटरों पर 2000 पाउंड के बम गिराए हैं। अमेरिकी जनरल डैन कीन ने बताया कि यह अब तक का सबसे बड़ा हवाई हमला है।
पड़ोसी देशों पर इस हमले का क्या प्रभाव पड़ा?
ईरान पर हो रहे इन हमलों का जवाब ईरान ने खाड़ी के अन्य देशों पर मिसाइलें दागकर दिया है। इस स्थिति को नीचे दी गई जानकारी से समझा जा सकता है:
- सऊदी अरब ने अपने किंग फहद एयरबेस को अमेरिकी सेना के लिए खोल दिया है।
- सऊदी सेना ने अब तक 40 से ज्यादा ईरानी ड्रोन्स को हवा में ही नष्ट किया है।
- यूएई, कुवैत और बहरीन में भी ईरानी मिसाइलों और ड्रोन्स के जरिए हमले किए गए हैं।
- जॉर्डन की राजधानी अम्मान में भी मिसाइल के टुकड़े गिरने की खबर मिली है।
- अमेरिका ने तेल की सप्लाई सामान्य रखने के लिए ईरानी तेल पर प्रतिबंधों में 30 दिनों की छूट दी है।




