ईरान की अमेरिका को खुली धमकी, तेल और IT सिस्टम पर हमले की दी चेतावनी
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर काफी बढ़ गया है। ईरान ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि अगर उसके ठिकानों पर हमला हुआ तो वह अमेरिकी ऊर्जा और IT सिस्टम को निशाना बनाएगा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दिए गए 48 घंटे के अल्टीमेटम के बाद यह बयान सामने आया है। वर्तमान में हजारों अमेरिकी नौसैनिक और विशिष्ट सैन्य इकाइयां मध्य पूर्व की ओर बढ़ रही हैं जिससे युद्ध का खतरा गहरा गया है।
ईरान ने किन ठिकानों को निशाना बनाने की बात कही है?
ईरान के सैन्य मुख्यालय खातम अल-अंबिया के प्रवक्ता ने कहा है कि अगर हमला हुआ तो वे केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहेंगे। ईरान ने अमेरिका और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों के ऊर्जा संयंत्रों, IT बुनियादी ढांचे और पानी साफ करने वाले प्लांट यानी Desalination facilities को निशाना बनाने की धमकी दी है। ईरानी सैन्य सूत्रों का कहना है कि किसी भी तरह का जमीनी हमला उनके लिए रेड लाइन होगा और इसका परिणाम बहुत घातक हो सकता है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अमेरिकी सैनिक ईरानी मिट्टी से वापस नहीं लौट पाएंगे।
पेंटागन की युद्ध की तैयारी और अन्य देशों का रुख क्या है?
ताजा रिपोर्टों के अनुसार पेंटागन ने ईरान में जमीनी सेना भेजने के लिए विस्तृत योजना तैयार कर ली है। इसमें ईरानी सैनिकों को पकड़ने और हिरासत में लेने की रणनीतियां भी शामिल हैं। सऊदी अरब और ब्रिटेन जैसे देशों ने भी इस संकट में अपनी भूमिका को लेकर संकेत दिए हैं। खाड़ी में रहने वाले प्रवासियों और विशेषकर भारतीयों के लिए यह स्थिति चिंताजनक हो सकती है क्योंकि इससे तेल की कीमतों और सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।
| देश और संस्था | ताजा अपडेट और कार्रवाई |
|---|---|
| सऊदी अरब | ताइफ में किंग फहद एयर बेस के इस्तेमाल की अनुमति दी |
| यूनाइटेड किंगडम | ब्रिटिश एयर बेस से ईरानी मिसाइल साइटों पर हमले की मंजूरी दी |
| अमेरिकी ट्रेजरी | तेल की सप्लाई के लिए फंसे हुए 140 मिलियन बैरल ईरानी तेल की बिक्री की अनुमति दी |
| पेंटागन | हजारों मरीन और विशिष्ट इकाइयां खाड़ी की ओर रवाना की |
हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप ने सार्वजनिक तौर पर अभी जमीनी सेना भेजने के किसी भी अंतिम फैसले से इनकार किया है। लेकिन व्हाइट हाउस का कहना है कि पेंटागन को हर स्थिति के लिए तैयार रहने को कहा गया है ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत एक्शन लिया जा सके। ईरान ने बातचीत की इच्छा तो जताई है लेकिन इसके लिए उसने युद्धविराम और हर्जाने जैसी कड़ी शर्तें सामने रखी हैं।




