इजरायल और ईरान के बीच जंग तेज, नेतन्याहू ने कहा अभी कई हफ्तों तक जारी रहेगी लड़ाई
इजरायल और ईरान के बीच चल रही जंग अब एक गंभीर मोड़ पर पहुंच गई है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने संकेत दिए हैं कि ईरान और हिजबुल्लाह के खिलाफ यह लड़ाई अभी कई हफ्तों तक जारी रह सकती है। 22 मार्च 2026 को आए बयानों के अनुसार, इजरायल ने अपनी सैन्य कार्रवाई को और अधिक तेज कर दिया है। इस टकराव की वजह से पूरे क्षेत्र में असुरक्षा का माहौल बना हुआ है और आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
इजरायल और लेबनान में क्या हैं सैन्य हालात?
इजरायली रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज़ ने सेना को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे लेबनान के सीमावर्ती गांवों में घरों को गिराने का काम तेज करें। इसके साथ ही लिटानी नदी (Litani River) पर बने उन सभी पुलों को तुरंत नष्ट करने का आदेश दिया गया है जिनका इस्तेमाल हिजबुल्लाह अपनी गतिविधियों के लिए कर रहा था। इजरायल का कहना है कि ईरान ने अराद (Arad) और डिमोना (Dimona) जैसे नागरिक इलाकों में मिसाइल दागकर पूरी दुनिया को खतरे में डाल दिया है। पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट ने चेतावनी दी है कि ईरान की मिसाइलें अब बर्लिन और पेरिस तक पहुंचने में सक्षम हैं।
क्षेत्रीय तनाव और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है कि वह हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को जहाजों के लिए खोल दे। अगर ऐसा नहीं होता है तो अमेरिका ने ईरान के पावर प्लांट्स को तबाह करने की धमकी दी है। इस बीच सऊदी अरब ने अपने देश से ईरान के सैन्य अधिकारियों और दूतावास के कर्मचारियों को बाहर निकाल दिया है। लेबनान में युद्ध की वजह से हालात बहुत खराब हो गए हैं और वहां लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं। जंग के असर को नीचे दी गई तालिका से समझा जा सकता है:
| देश | अनुमानित मौतें | विस्थापित लोग |
|---|---|---|
| ईरान | 1500 से अधिक | – |
| लेबनान | 1000 से अधिक | 10 लाख से ज्यादा |
| इजरायल | 15 | हजारों में |
ईरान के सैन्य प्रवक्ता ने भी साफ कर दिया है कि अगर उनके एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर कोई हमला हुआ, तो वे अमेरिका और इजरायल के ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई करेंगे। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस स्थिति को बहुत खतरनाक बताया है और परमाणु साइटों के आसपास हो रहे हमलों पर चिंता जताई है। फिलहाल किसी भी पक्ष की ओर से युद्ध विराम के संकेत नहीं मिल रहे हैं।




