Brent Crude Prices: कच्चे तेल की कीमतों में 56% का भारी उछाल, 112 डॉलर के पार पहुंचा भाव
मिडिल ईस्ट में अमेरिका, ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते संघर्ष ने पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार में हलचल पैदा कर दी है। सोमवार 23 मार्च 2026 को ब्रेंट क्रूड (Brent crude) के भाव 112 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गए। रिपोर्ट के मुताबिक पिछले एक महीने के भीतर कच्चे तेल की कीमतों में 56 प्रतिशत की बढ़त देखी गई है। युद्ध शुरू होने से पहले कच्चे तेल का भाव 70 डॉलर प्रति बैरल के करीब था।
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तेल की कीमतों में अचानक आई तेजी के क्या कारण हैं?
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव की वजह से ग्लोबल सप्लाई चैन बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसके मुख्य कारणों में निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं:
- Strait of Hormuz से होने वाले समुद्री व्यापार में 97 प्रतिशत तक की भारी गिरावट आई है।
- ईरानी हमलों की वजह से कतर की LNG एक्सपोर्ट क्षमता में 17 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
- इजराइल द्वारा ईरान के गैस ठिकानों पर किए गए हमलों से सप्लाई बाधित हो गई है।
- अमेरिका और इजराइल के सैन्य अभियान Operation Epic Fury ने क्षेत्र में तनाव और बढ़ा दिया है।
भारत और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका क्या असर होगा?
कच्चे तेल के बढ़ते भाव का सबसे ज्यादा असर उन देशों पर पड़ा है जो अपनी जरूरत के लिए आयात पर निर्भर हैं। भारत के कच्चे तेल के आयात में मार्च महीने में कमी आई है क्योंकि सऊदी अरब और इराक जैसे प्रमुख देशों से सप्लाई घटी है।
| विवरण | कीमत और प्रभाव |
|---|---|
| युद्ध से पहले की कीमत | 70 डॉलर प्रति बैरल |
| 23 मार्च 2026 को कीमत | 112 डॉलर प्रति बैरल |
| संभावित उच्चतम स्तर | 150 डॉलर प्रति बैरल |
| ब्याज दर अनुमान | 3.50% से 3.75% तक |
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष जेरोम पॉवेल ने चेतावनी दी है कि ऊर्जा की बढ़ती कीमतों की वजह से आने वाले समय में ब्याज दरों को ऊंचा रखना पड़ सकता है। सिटी बैंक के विश्लेषकों का मानना है कि अगर तनाव नहीं थमा तो ब्रेंट क्रूड 150 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती जुबानी जंग
ताजा जानकारी के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर Strait of Hormuz को जल्द नहीं खोला गया तो ईरान के ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है। इसके जवाब में ईरान के सैन्य प्रवक्ता इब्राहिम जोलफाकरी ने कहा है कि अगर उनके ठिकानों पर हमला हुआ तो वे क्षेत्र में मौजूद सभी अमेरिकी और इजराइली ऊर्जा केंद्रों पर जवाबी कार्रवाई करेंगे। इस स्थिति ने निवेशकों के बीच चिंता बढ़ा दी है जिससे कीमतों में लगातार उछाल आ रहा है।




