Iran War Impact: भारत में पानी और तेल के दाम बढ़े, बोतलबंद पानी और इंडस्ट्रियल डीजल की कीमतों ने बढ़ाई टेंशन
ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच छिड़ी जंग का सीधा असर अब भारत के आम नागरिकों की जेब पर पड़ने लगा है। उत्तर भारत के इलाकों में पानी, ईंधन और खाने के सामान की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कच्चे तेल के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार में 120 डॉलर के करीब पहुंचने से प्लास्टिक पैकेजिंग और माल ढुलाई महंगी हो गई है। प्रधानमंत्री मोदी ने शांति की अपील की है लेकिन युद्ध की वजह से सप्लाई चैन पर बड़ा दबाव बना हुआ है।
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आम आदमी पर क्या पड़ रहा है असर और कितनी बढ़ी कीमतें?
युद्ध की वजह से भारत के मध्यम वर्ग और ग्रामीण इलाकों में महंगाई का बोझ बढ़ता जा रहा है। बोतलबंद पानी बनाने वाली कंपनियों ने अपनी कीमतों में 11% तक का इजाफा किया है क्योंकि प्लास्टिक की बोतल बनाने का खर्च बढ़ गया है। इसके अलावा प्रीमियम पेट्रोल और इंडस्ट्रियल डीजल के दाम भी बढ़े हैं। ट्रांसपोर्ट महंगा होने की वजह से बाजारों में आने वाली सब्जियों की कीमतों में भी 10 से 15 रुपये तक की तेजी देखी गई है। सरकार ने गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए विशेष नियम लागू किए हैं।
वैश्विक हालात और भारत सरकार के बड़े फैसले
- इंडस्ट्रियल डीजल की कीमतों में 25% की भारी बढ़ोतरी की गई है।
- प्रीमियम पेट्रोल के दाम 2 रुपये से 2.35 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ गए हैं।
- बोतलबंद पानी की लागत में 11% की वृद्धि दर्ज हुई है।
- कच्चे तेल के दाम बढ़ने से प्लास्टिक पैकेजिंग महंगी हो गई है।
- सब्जियों के दाम में 10 से 15 रुपये प्रति किलो की बढ़त हुई है।
- भारत सरकार ने घरेलू PNG और CNG सप्लाई को प्राथमिकता देने के आदेश दिए हैं।
भारत सरकार ने साफ़ किया है कि आम आदमी के लिए इस्तेमाल होने वाले रेगुलर पेट्रोल और डीजल के दाम फिलहाल नहीं बढ़ाए जाएंगे। हालांकि गैस वितरण में प्राथमिकता अब घरेलू ग्राहकों को दी जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने फिलहाल हमलों को कुछ दिनों के लिए टाला है लेकिन ईरान ने जवाबी कार्रवाई और समुद्री रास्ते बंद करने की चेतावनी दी है। IEA ने इसे दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए बहुत बड़ा खतरा बताया है।




