West Asia Conflict: विदेश मंत्री जयशंकर और ईरानी राजदूत के बीच हुई बड़ी बैठक, भारतीयों की सुरक्षा को लेकर मिला आश्वासन
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने नई दिल्ली में ईरान के राजदूत डॉ. मोहम्मद फतहाली से मुलाकात की है। मंगलवार, 24 मार्च 2026 को हुई इस बैठक में पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात और वहां चल रहे संघर्ष पर गंभीर चर्चा की गई। भारत सरकार ने ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और इस कठिन समय में उन्हें मिल रहे सहयोग के लिए ईरानी प्रशासन की सराहना की है।
बैठक के मुख्य बिंदु और भारतीयों की सुरक्षा की स्थिति
विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस बैठक की जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि डॉ. मोहम्मद फतहाली के साथ पश्चिम एशिया के संकट पर बात हुई और चुनौतीपूर्ण समय में भारतीयों को दिए जा रहे समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया गया। इस बैठक के दौरान कुछ अन्य महत्वपूर्ण बातें भी सामने आई हैं:
- ईरानी राजदूत ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में अमेरिका के साथ किसी भी तरह की बातचीत नहीं चल रही है।
- ईरान ने अमेरिका द्वारा दिए गए 48 घंटे के अल्टीमेटम को बाजार में हेरफेर करने की कोशिश बताया है।
- राजदूत के अनुसार होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) उन देशों के लिए खुला रहेगा जो आक्रामक नहीं हैं।
- जब तक विरोधी पक्ष के व्यवहार में बदलाव नहीं आता, तब तक कूटनीतिक रास्ते की कोई गुंजाइश नहीं है।
भारत सरकार की तैयारी और कूटनीतिक प्रयास
पश्चिम एशिया के बदलते हालातों को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मोर्चा संभाला है। प्रधानमंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बात की और शांति बहाली के साथ-साथ होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने की महत्ता पर जोर दिया है। भारत सरकार ने इस स्थिति से निपटने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए हैं:
| दिनांक | महत्वपूर्ण घटनाक्रम |
|---|---|
| 24 मार्च 2026 | पीएम मोदी ने राज्यसभा में बताया कि स्थिति हर पल बदल रही है। |
| 24 मार्च 2026 | सात सशक्त अंतर-मंत्रालयी समूहों का गठन किया गया। |
| 23 मार्च 2026 | जयशंकर ने GCC देशों के राजदूतों के साथ बैठक की। |
| 23 मार्च 2026 | अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से फोन पर चर्चा हुई। |
प्रधानमंत्री ने राज्यसभा में जानकारी दी कि ये सात सरकारी समूह ऊर्जा आपूर्ति, व्यापार प्रवाह और सप्लाई चेन पर पड़ने वाले किसी भी जोखिम की निगरानी करेंगे। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से भी बात की थी, जिसमें बुनियादी ढांचे पर हमलों की निंदा की गई और सुरक्षित समुद्री रास्तों की सुरक्षा पर चर्चा हुई थी।




