PM Modi ने पश्चिम एशिया संकट पर राज्यों से मांगी मदद, प्रवासियों और गरीबों के लिए जारी हुए विशेष निर्देश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार 24 मार्च 2026 को राज्यसभा और सोमवार 23 मार्च को लोकसभा में पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात पर अपनी बात रखी। उन्होंने देश के सामने आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत बताई। पीएम ने साफ किया कि इस संकट के समय में गरीब तबके और विशेष रूप से प्रवासी कामगारों की सुरक्षा और उनकी जरूरतों को पूरा करना सरकार की बड़ी प्राथमिकता है।
प्रवासियों और गरीबों की मदद के लिए क्या निर्देश दिए गए?
प्रधानमंत्री ने राज्य सरकारों से आग्रह किया है कि वे प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को पूरी मुस्तैदी के साथ लागू करें ताकि मजदूरों और गरीब परिवारों को भोजन की समस्या न हो। उन्होंने राज्यों को विशेष रूप से प्रवासी मजदूरों की परेशानियों को कम करने के लिए सक्रिय कदम उठाने को कहा है। इसके अलावा, जरूरी चीजों की कमी न हो, इसके लिए जमाखोरी और कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ तुरंत सख्त कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं।
युद्ध के बीच भारत की रणनीति और अब तक की स्थिति क्या है?
भारत सरकार ने ईंधन, खाद और सप्लाई चेन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के प्रबंधन के लिए सात विशेष समूह (Empowered Groups) बनाए हैं। पीएम मोदी ने संसद को भरोसा दिलाया कि सरकार भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। अब तक 3.75 लाख से अधिक भारतीयों को उस क्षेत्र से सुरक्षित निकाला जा चुका है, जिसमें ईरान से लाए गए 1,000 से अधिक नागरिक भी शामिल हैं। भारत ने अपना रुख साफ रखा है कि बातचीत और कूटनीति ही किसी भी विवाद का एकमात्र समाधान है।
| मुख्य विवरण | आंकड़े / जानकारी |
|---|---|
| सुरक्षित निकाले गए भारतीय | 3.75 लाख से अधिक |
| ईरान से रेस्क्यू किए गए लोग | 1,000 से अधिक |
| संकट प्रबंधन समूह | 7 विशेष अधिकार प्राप्त ग्रुप |
| विदेशी नेताओं से बातचीत | डोनाल्ड ट्रंप (US), अनुरा कुमारा दिसानायके और अन्य |
विपक्ष ने इस संबोधन पर क्या सवाल उठाए?
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री के इस संबोधन की आलोचना करते हुए इसे केवल खुद की तारीफ करने वाला भाषण बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियां राज्यों के अधिकारों के खिलाफ हैं। राहुल गांधी ने भारत की विदेश नीति को बाहरी दबाव में होना बताया, जबकि मनीष तिवारी ने चेतावनी दी कि पश्चिम एशिया में बढ़ती लड़ाई का असर वैश्विक सप्लाई चेन और जरूरी सामानों की कीमतों पर पड़ सकता है। हालांकि, बीजेपी नेताओं ने पीएम के इस कदम को दूरदर्शी और साहसिक बताया है।




