ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत के दावे को नकारा, कुवैत और बहरीन में सैन्य ठिकानों पर हमले से बढ़ा तनाव
ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव के बीच विरोधाभासी खबरें सामने आ रही हैं। पाकिस्तान में ईरान के राजदूत रज़ा अमीरी मोघदाम ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका के साथ कोई सीधी या अप्रत्यक्ष बातचीत नहीं हुई है। यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे के बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि दोनों देश बातचीत कर रहे हैं और समझौते के करीब हैं। इस बीच खाड़ी क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां काफी तेज हो गई हैं और कई ठिकानों को निशाना बनाया गया है।
ईरान के राजदूत का बयान और अमेरिका का 15 सूत्रीय प्रस्ताव
राजदूत रज़ा अमीरी मोघदाम ने कहा है कि अमेरिका के साथ किसी भी स्तर पर बातचीत नहीं हुई है, हालांकि उन्होंने माना कि कुछ मित्र देश मदद की कोशिश कर रहे हैं। दूसरी ओर, अमेरिका ने पाकिस्तान के जरिए ईरान को 15 बिंदुओं वाला एक युद्धविराम प्रस्ताव भेजा है। इस प्रस्ताव में मुख्य रूप से ये बातें शामिल बताई जा रही हैं:
- ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों में राहत देना और परमाणु सहयोग बढ़ाना।
- ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करना और अंतरराष्ट्रीय एजेंसी की निगरानी बढ़ाना।
- मिसाइल क्षमता पर रोक लगाना और सुरक्षित समुद्री रास्ता सुनिश्चित करना।
- परमाणु हथियारों को कभी न बनाने की लिखित प्रतिबद्धता जताना।
हालिया हमले और सुरक्षा व्यवस्था पर मौजूदा अपडेट
पिछले 24 घंटों में क्षेत्र में सैन्य हलचल काफी बढ़ गई है जिससे आम लोगों और प्रवासियों के बीच चिंता का माहौल है। ईरान की सेना ने अमेरिका से किसी भी बातचीत की संभावना को फिलहाल खारिज किया है। 25 मार्च 2026 को हुए प्रमुख घटनाक्रमों की जानकारी नीचे दी गई है:
| तारीख | प्रमुख घटनाक्रम |
|---|---|
| 25 मार्च 2026 | कुवैत, जॉर्डन और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमले हुए। |
| 25 मार्च 2026 | कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर ड्रोन हमले के बाद आग लगने की खबर मिली। |
| 25 मार्च 2026 | इजरायल ने तेहरान में एक मिसाइल उत्पादन केंद्र को निशाना बनाया। |
| 25 मार्च 2026 | ईरान ने कहा कि नियमों को मानने वाले जहाजों को हॉरमुज़ से जाने दिया जाएगा। |
पाकिस्तान अब 27 मार्च 2026 को दोनों देशों के बीच आमने-सामने की बैठक कराने की कोशिश कर रहा है। मिस्र, ओमान और तुर्की जैसे देश भी इस तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास कर रहे हैं। खाड़ी में रहने वाले भारतीयों और अन्य प्रवासियों के लिए यह स्थिति काफी जरूरी है क्योंकि कुवैत जैसे देशों में हवाई यात्रा और सुरक्षा पर इसका असर पड़ रहा है।




