Saudi Arabia News: सऊदी ने मानवाधिकार परिषद में ईरान को घेरा, कहा मध्यस्थता के साथ हुआ बड़ा विश्वासघात
जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की बैठक के दौरान सऊदी अरब ने ईरान की सैन्य कार्रवाइयों पर कड़ी आपत्ति जताई है। सऊदी प्रतिनिधि ने कहा है कि ईरान की ओर से किए गए हमले शांति की कोशिशों के साथ एक बड़ा धोखा हैं। इस बैठक में खाड़ी देशों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय नियमों के उल्लंघन के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई है। सऊदी अरब ने साफ किया है कि इस तरह की आक्रामकता को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
सऊदी अरब के प्रतिनिधि ने ईरान पर क्या आरोप लगाए?
सऊदी अरब के स्थायी प्रतिनिधि Ambassador Abdulmohsen bin Khothaila ने बैठक में अपनी बात रखते हुए कहा कि ईरान की सैन्य कार्रवाइयों का कोई बचाव नहीं किया जा सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान को अपनी इन हरकतों के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। सऊदी प्रतिनिधि के मुताबिक ये हमले अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का सीधा उल्लंघन हैं। ईरान की इस कार्रवाई से उन कोशिशों को नुकसान पहुंचा है जो क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए की जा रही थीं।
मानवाधिकार परिषद की बैठक में क्या-क्या हुआ?
25 मार्च 2026 को हुई इस बैठक में कई देशों ने अपनी राय रखी और ईरान के हमलों की निंदा की। इस चर्चा के दौरान सामने आई मुख्य बातें कुछ इस प्रकार हैं:
- सऊदी अरब: ईरान के हमलों को संप्रभुता का उल्लंघन और मध्यस्थता के साथ विश्वासघात बताया।
- यूनाइटेड किंगडम: ब्रिटेन की राजदूत Eleanor Sanders ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों की कड़ी निंदा की।
- ओमान: ओमान के प्रतिनिधि Idris Abdul Rahman Al Khanjari ने हिंसा पर चिंता जताई और बातचीत का समर्थन किया।
- नेविगेशन सुरक्षा: बैठक में Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही को रोकने पर भी चिंता जाहिर की गई।
- मध्यस्थता प्रयास: पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र जैसे देश अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता करवाने की कोशिश कर रहे हैं।
खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले लोगों पर इसका क्या असर होगा?
सऊदी अरब और खाड़ी के अन्य देशों में रहने वाले लाखों प्रवासियों के लिए सुरक्षा की स्थिति सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है। ईरान के साथ बढ़ते तनाव और समुद्री रास्तों में रुकावट आने से व्यापार और यात्रा पर असर पड़ने की संभावना रहती है। हालांकि सऊदी अरब ने स्पष्ट किया है कि वह युद्ध को आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं है और लगातार शांति के लिए प्रयास कर रहा है। प्रवासियों को फिलहाल किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न देने और आधिकारिक सूचनाओं का पालन करने की सलाह दी गई है।




