UAE पर ईरान के हमलों में तेजी, 1800 ड्रोन और मिसाइलें दागी गई, आर्थिक ठिकानों को पहुंचाया नुकसान
यूएई और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष में चौंकाने वाले आधिकारिक आंकड़े सामने आए हैं। 28 फरवरी 2026 से शुरू हुई इस जंग में ईरान ने यूएई को अपना सबसे बड़ा निशाना बनाया है। रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, यूएई पर हुए हमलों की संख्या इज़राइल के मुकाबले कहीं अधिक है। इन हमलों का मुख्य उद्देश्य यूएई के बड़े आर्थिक प्रोजेक्ट्स और व्यापारिक केंद्रों को नुकसान पहुंचाना बताया गया है। इसमें रिफाइनरी, पोर्ट और एयरपोर्ट जैसे महत्वपूर्ण स्थान शामिल हैं।
यूएई पर हुए हमलों का आधिकारिक डेटा और नुकसान की जानकारी
यूएई के रक्षा मंत्रालय और आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, पिछले कुछ हफ्तों में हमलों की संख्या में भारी बढ़ोतरी देखी गई है। ईरान ने अपने कुल हमलों का लगभग 48 प्रतिशत हिस्सा अकेले यूएई की तरफ केंद्रित किया है। इन हमलों में अब तक 8 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें पाकिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश के प्रवासी नागरिक भी शामिल हैं। कुल 166 लोग घायल हुए हैं।
| हमले का प्रकार | कुल संख्या (लगभग) |
|---|---|
| बैलिस्टिक मिसाइलें (Ballistic Missiles) | 357 |
| क्रूज मिसाइलें (Cruise Missiles) | 15 |
| ड्रोन (Drones) | 1,815 |
| कुल हमले (UAE की तरफ) | 3,056 |
किन खास जगहों को बनाया गया निशाना और क्या है वजह?
ईरान ने यूएई के उन ठिकानों पर हमला किया है जो पूरी दुनिया के व्यापार और तकनीक के लिए जरूरी हैं। इसमें Ruwais refinery और Jebel Ali port जैसे व्यापारिक केंद्र शामिल हैं। Dubai International Airport पर भी हमलों का प्रयास किया गया है। इसके अलावा Amazon Web Services (AWS) के डेटा सेंटर को नुकसान पहुंचने से क्षेत्र की क्लाउड सेवाओं में बाधा आई है। यह हमले उस समय हो रहे हैं जब यूएई अमेरिका के साथ 1.4 ट्रिलियन डॉलर का बड़ा आर्थिक समझौता कर चुका है।
- आर्थिक नुकसान: हमलों का मकसद यूएई में हो रहे विदेशी निवेश को रोकना और डर का माहौल बनाना है।
- प्रवासियों पर असर: इन हमलों से यूएई में काम करने वाले लाखों भारतीय और अन्य दक्षिण एशियाई प्रवासियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है।
- यूएई का रुख: यूएई सरकार ने कहा है कि वह अपनी सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून के हिसाब से कदम उठाएगी और अपनी जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ नहीं होने देगी।
- तकनीकी हमला: Nvidia के चिप्स और Microsoft जैसे बड़े निवेश वाले प्रोजेक्ट्स के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की कोशिश की गई है।




