Jordan Missile Attack: जॉर्डन का बड़ा एक्शन, ईरान की 5 मिसाइलों और ड्रोन को मार गिराया, सीमा पर सुरक्षा बढ़ी
जॉर्डन की सशस्त्र सेना ने पिछले 24 घंटों के दौरान अपने क्षेत्र की ओर आने वाली पांच मिसाइलों और एक ड्रोन को नष्ट करने का दावा किया है। यह हमला ईरान की ओर से किया गया था जिसे जॉर्डन की रॉयल एयर फ़ोर्स ने सफलतापूर्वक रोक दिया। हालांकि एक मिसाइल को एयर डिफेंस सिस्टम नहीं रोक पाया जो क्षेत्र में गिर गई। इस घटना के बाद जॉर्डन और आसपास के खाड़ी देशों में सुरक्षा व्यवस्था को काफी कड़ा कर दिया गया है।
हमले में कितना नुकसान हुआ और सुरक्षा बलों ने क्या कहा?
पब्लिक सिक्योरिटी डायरेक्टोरेट के अनुसार पिछले 24 घंटों में आसमान से मलबे और मिसाइल के टुकड़ों के गिरने की कुल 15 रिपोर्ट दर्ज की गई हैं। राहत की बात यह है कि इन घटनाओं में किसी भी व्यक्ति के घायल होने की खबर नहीं है और नुकसान केवल कुछ संपत्तियों तक ही सीमित रहा है। जॉर्डन के सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल मुस्तफा अल-हयारी ने उन दावों को खारिज कर दिया जिनमें कहा जा रहा था कि ये मिसाइलें केवल जॉर्डन के रास्ते से गुजर रही थीं। उन्होंने साफ किया कि इन मिसाइलों और ड्रोन का निशाना जॉर्डन के अंदर मौजूद महत्वपूर्ण ठिकाने ही थे।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर जॉर्डन और अन्य देशों का क्या रुख रहा?
जॉर्डन के राजदूत अकरम अल-हराहशेह ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में इन हमलों की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का सीधा उल्लंघन और देश की संप्रभुता पर हमला बताया है। जॉर्डन के विदेश मंत्री अयमान सफादी ने भी कहा कि जॉर्डन ने अपनी जमीन या आसमान का इस्तेमाल किसी के खिलाफ नहीं होने देने की पूरी कोशिश की है, फिर भी ईरान ने बिना किसी वजह के हमला किया।
हमले से जुड़े मुख्य आंकड़े और जानकारी:
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| कुल मिसाइलें और ड्रोन | 5 मिसाइल और 1 ड्रोन |
| नष्ट किए गए हथियार | 5 (मिसाइल और ड्रोन मिलाकर) |
| मलबे गिरने की घटनाएं | 15 स्थान |
| फरवरी से अब तक इंटरसेप्ट | 240 से ज्यादा मिसाइलें |
| मददगार देश | अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस |
| अन्य प्रभावित देश | यूएई, बहरीन, सऊदी अरब, कतर और कुवैत |
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने भी इस बात को स्वीकार किया है कि उन्होंने कुवैत, जॉर्डन और बहरीन में मौजूद सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर मिसाइलें दागी थीं। जॉर्डन की सरकार अब इस मामले को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ले गई है और वहां इस पर संकल्प 2817 भी पारित किया गया है।




