S Jaishankar ने पाकिस्तान को कहा ‘दलाल राष्ट्र’, मिडिल ईस्ट युद्ध में मध्यस्थता की कोशिश पर भारत ने दिया करारा जवाब
भारत के विदेश मंत्री S Jaishankar ने मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के बीच पाकिस्तान की ओर से की जा रही मध्यस्थता की कोशिशों पर बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी है। दिल्ली में आयोजित एक सर्वदलीय बैठक के दौरान उन्होंने पाकिस्तान को ‘दलाल राष्ट्र’ (broker nation) कहकर संबोधित किया। भारत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वह अपनी अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिए किसी तीसरे पक्ष या बिचौलिए पर निर्भर नहीं रहेगा और अपने फैसले खुद लेगा।
पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिश और भारत का रुख
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने हाल ही में बयान दिया था कि इस्लामाबाद अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कराने के लिए पूरी तरह तैयार है। इसके जवाब में S Jaishankar ने कहा कि भारत को अपनी diplomatic विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए किसी के माध्यम की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने सर्वदलीय बैठक में बताया कि अमेरिका 1981 से ही ईरान के साथ संपर्क साधने के लिए पाकिस्तान का इस्तेमाल करता रहा है, इसलिए पाकिस्तान का यह दावा कोई नई कूटनीतिक सफलता नहीं है। भारत ने विपक्षी दलों के उन दावों को भी खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि भारत इस मुद्दे पर चुप है।
मिडिल ईस्ट संकट और वर्तमान स्थिति के मुख्य बिंदु
इस पूरे मामले में अलग-अलग देशों की भूमिका और मौजूदा हालात को नीचे दी गई तालिका के माध्यम से समझा जा सकता है:
| पक्ष | प्रमुख घटनाक्रम और बयान |
|---|---|
| S Jaishankar (भारत) | पाकिस्तान को ‘दलाल राष्ट्र’ बताया और स्वतंत्र नीति पर जोर दिया। |
| Shehbaz Sharif (पाकिस्तान) | अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता की मेजबानी का प्रस्ताव रखा। |
| ईरान | सीधी बातचीत से इनकार किया, हालांकि संदेश मिलने की बात स्वीकार की। |
| विपक्ष (भारत) | Jairam Ramesh ने इसे भारत की कूटनीति के लिए एक झटका बताया था। |
| संयुक्त राष्ट्र (UN) | मिडिल ईस्ट युद्ध को नियंत्रण से बाहर बताते हुए शांति की अपील की। |
मिडिल ईस्ट में यह संघर्ष चौथे हफ्ते में प्रवेश कर चुका है। रिपोर्ट्स के अनुसार, 28 फरवरी 2026 को ईरान पर हुए हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि उसे कुछ ‘मित्र देशों’ के माध्यम से प्रस्ताव मिले हैं, लेकिन उसने अमेरिका के 15 सूत्रीय प्रस्ताव को ठुकराते हुए अपनी शर्तें सामने रखी हैं। भारत इस पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है और अपनी राष्ट्रीय हितों के अनुसार प्रतिक्रिया दे रहा है।




