Strait of Hormuz में फंसे 20,000 नाविक, 2,000 जहाज़ों के पहिये थमे, ग्लोबल शिपिंग इंडस्ट्री के लिए बड़ी चुनौती
Strait of Hormuz में चल रहे तनाव ने ग्लोबल शिपिंग इंडस्ट्री के सामने बहुत बड़ी मुश्किल खड़ी कर दी है। इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गेनाइजेशन (IMO) के चीफ Arsenio Dominguez ने बताया है कि इस क्षेत्र में फिलहाल 20,000 नाविक फंसे हुए हैं और करीब 2,000 जहाज़ों की आवाजाही रुकी हुई है। यह स्थिति न केवल व्यापार बल्कि वहां काम करने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए भी खतरनाक हो गई है। खाड़ी देशों के समुद्री रास्तों पर निर्भर रहने वाले प्रवासियों और व्यापारिक संगठनों के लिए यह खबर काफी चिंताजनक है क्योंकि इससे सामान की सप्लाई पर सीधा असर पड़ रहा है।
शिपिंग संकट और प्रभावित आंकड़ों की पूरी जानकारी
इस संकट की वजह से समुद्री यातायात में भारी गिरावट आई है और नाविकों की जान पर खतरा बना हुआ है। मार्च 2026 की शुरुआत से अब तक कई हिंसक घटनाएं हो चुकी हैं, जिसने अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को हिलाकर रख दिया है।
| विवरण | प्रभावित आंकड़े |
|---|---|
| फंसे हुए कुल नाविक | लगभग 20,000 (अधिकतम 60,000 की आशंका) |
| प्रभावित जहाज़ | 2,000 से 3,000 के बीच |
| पुष्टि की गई मौतें | कम से कम 7 नाविक |
| ट्रैफिक में गिरावट | 90% की कमी आई |
| पुष्टि की गई घटनाएं | 1 मार्च 2026 से 20 घटनाएं |
नाविकों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय प्रयास क्या हैं?
IMO के महासचिव Arsenio Dominguez का कहना है कि मासूम नाविकों या नागरिक जहाज़ों पर हमला किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने शिपिंग कंपनियों को सलाह दी है कि वे इस क्षेत्र में बेहद सावधानी बरतें और जहां तक मुमकिन हो, इस रास्ते का इस्तेमाल करने से बचें। इंटरनेशनल चैंबर ऑफ शिपिंग (ICS) ने भी चेतावनी दी है कि जहाज़ों पर मौजूद राशन और ईंधन कम हो रहा है, जिससे वहां फंसे क्रू मेंबर्स के मानसिक तनाव और मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं।
इस संकट से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हलचल तेज़ हो गई है। 19 मार्च 2026 को IMO ने एक विशेष बैठक बुलाई थी। इसके साथ ही अमेरिका, NATO और 22 देशों का गठबंधन, जिसमें UAE और बहरीन जैसे देश भी शामिल हैं, समुद्री सुरक्षा के लिए तालमेल बिठा रहे हैं। भारत और खाड़ी देशों के बीच होने वाले व्यापार पर भी इसका असर दिख रहा है, क्योंकि ज़्यादातर जहाज़ इसी रास्ते से होकर गुजरते हैं। फंसे हुए लोगों में बड़ी संख्या में विदेशी कामगार शामिल हैं, जिनकी सुरक्षा अब वैश्विक चिंता का विषय है।




