ईरान का ‘Wave 82’ ऑपरेशन शुरू, खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल से हमले का दावा
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने गुरुवार 26 मार्च 2026 को अमेरिका और इजराइल के खिलाफ अपने सैन्य अभियान के 82वें चरण की शुरुआत की है। ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह हमला तड़के सुबह शुरू हुआ जिसे ‘या अली इब्न मूसा अल-रेज़ा’ कोडनेम दिया गया है। इस कार्रवाई में कुवैत, सऊदी अरब और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को ड्रोन और मिसाइलों से निशाना बनाने की बात कही गई है। खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले प्रवासियों और भारतीयों के लिए यह स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है क्योंकि युद्ध का दायरा अब पड़ोसी मुल्कों तक फैल रहा है।
ईरान ने किन ठिकानों पर हमले का दावा किया है?
ईरानी सेना ने इस नए हमले में कई महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है। इसकी विस्तृत जानकारी नीचे दी गई है:
| देश | निशाना बनाए गए ठिकाने |
|---|---|
| कुवैत | आरिफजान बेस, डिफेंस लॉजिस्टिक्स साइट KGL और अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट |
| सऊदी अरब | अल-खर्ज स्थित सैन्य ठिकाने |
| बहरीन | शेख ईसा बेस |
| इजराइल | कमांड कंट्रोल सेंटर और परमाणु बुनियादी ढांचे वाले क्षेत्र |
इजराइल और अमेरिका की क्या रही जवाबी कार्रवाई?
ईरान के इन हमलों के जवाब में इजराइली वायु सेना (IDF) ने तेहरान और इस्फहान में भारी बमबारी की है। इजराइल का दावा है कि उन्होंने ईरान की नेवल क्रूज मिसाइल उत्पादन साइटों को तबाह कर दिया है। दूसरी तरफ अमेरिकी सेना के अधिकारियों ने बताया है कि उनका ऑपरेशन भी योजना के मुताबिक चल रहा है। अमेरिका अब मध्य पूर्व में अपनी 82वीं एयरबोर्न डिवीजन तैनात करने की तैयारी कर रहा है। खाड़ी में काम करने वाले भारतीयों के लिए सुरक्षा अलर्ट जारी किया गया है क्योंकि ड्रोन हमलों के कारण हवाई यातायात और तेल सप्लाई पर भी असर पड़ने की आशंका है।
क्या शांति के लिए बातचीत की कोई गुंजाइश है?
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल अमेरिका के साथ किसी भी तरह की कोई बातचीत नहीं हो रही है। ईरान ने पाकिस्तान के जरिए भेजे गए अमेरिका के 15 सूत्रीय युद्धविराम प्रस्ताव को भी ठुकरा दिया है। ईरान का कहना है कि जब तक उनकी शर्तें जैसे कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर उनका अधिकार और नुकसान की भरपाई पूरी नहीं होती, हमले नहीं रुकेंगे। संयुक्त राष्ट्र और जर्मनी जैसे देशों ने चेतावनी दी है कि यह युद्ध अब नियंत्रण से बाहर होता जा रहा है और इससे पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया है।




