UAE का बड़ा बयान: ‘कोई भी देश हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बंधक नहीं बना सकता’, सुरक्षा और व्यापार पर जताई चिंता
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की अंतरराष्ट्रीय सहयोग राज्य मंत्री Reem Al Hashimy ने Strait of Hormuz को लेकर बड़ी बात कही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी देश को इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते को “बंधक” बनाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। UAE ने वैश्विक जलमार्गों के लिए अंतरराष्ट्रीय शासन और बेहतर प्रबंधन की वकालत की है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक व्यापार और सामान की कीमतों पर सीधा असर पड़ रहा है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य के मौजूदा हालात और आम जनता पर असर
इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते के बाधित होने से पूरी दुनिया में व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, समुद्री रास्ते में असुरक्षा की वजह से जहाजों का आवागमन काफी कम हो गया है। इसके चलते निम्नलिखित समस्याएं सामने आई हैं:
- समुद्री माल ढुलाई और जहाजों के बीमा (Insurance) की कीमतों में 10 गुना तक की बढ़ोतरी हुई है।
- विमान ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के टिकट महंगे हो गए हैं।
- खाद्य सामग्री और किराने के सामान की कीमतों में इजाफा हुआ है, जो आम प्रवासियों की जेब पर असर डाल रहा है।
- ईरान द्वारा जहाजों से सुरक्षित मार्ग के नाम पर भारी शुल्क वसूलने की खबरें भी सामने आई हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाए जा रहे कदम और भारत की भूमिका
UAE की मंत्री ने हाल ही में नई दिल्ली का दौरा किया था, जहां भारत के विदेश मंत्री के साथ क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री स्थिरता पर चर्चा हुई। दोनों देशों ने ईरान के मिसाइल हमलों और समुद्री खतरों की कड़ी निंदा की है। इस पूरे मामले को लेकर अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी सक्रिय हो गई हैं।
| संस्था/देश | मुख्य कार्रवाई |
|---|---|
| International Maritime Organization | ईरानी खतरों और जहाजों पर हमलों की आधिकारिक निंदा की गई। |
| संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद | प्रस्ताव 2817 के जरिए ईरान को नियमों के पालन का निर्देश दिया गया। |
| UAE सरकार | हॉर्मुज के रास्ते को खुला रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय शांति सेना की मांग पर विचार। |
| भारत और UAE | द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाकर समुद्री व्यापार को सुरक्षित बनाने पर सहमति। |
UAE के अधिकारियों ने Strait of Hormuz की घेराबंदी को आर्थिक आतंकवाद बताया है क्योंकि इससे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंच रहा है। फिलहाल, इस समुद्री रास्ते पर संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में समुद्री शांति अभियान चलाने के विकल्पों पर भी चर्चा की जा रही है ताकि तेल और अन्य सामान की आपूर्ति बनी रहे।




