Saudi Arabia और Qatar पहुंचे यूक्रेन के सैन्य विशेषज्ञ, ईरानी ड्रोन हमलों को रोकने में करेंगे मदद
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि उनके एक्सपर्ट्स की टीमें सऊदी अरब और कतर जैसे मध्य पूर्व के देशों में पहुंच चुकी हैं। ये टीमें वहां ईरानी ड्रोन हमलों का मुकाबला करने के लिए स्थानीय सुरक्षा बलों की मदद कर रही हैं। राष्ट्रपति ने बताया कि यूक्रेन का अनुभव इन हमलों को नाकाम करने में बहुत काम आ रहा है क्योंकि उनके विशेषज्ञ लंबे समय से ऐसे ड्रोन्स का सामना कर रहे हैं।
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किन देशों को यूक्रेन दे रहा है सुरक्षा और तकनीकी सहायता?
यूक्रेन ने सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन, जॉर्डन और कुवैत को अपनी वायु रक्षा प्रणालियों और विशेषज्ञता की पेशकश की है। ज़ेलेंस्की का कहना है कि मध्य पूर्व में पैट्रियट (Patriot) या थाड (THAAD) जैसे कितने भी एडवांस सिस्टम हों, वे यूक्रेन के अनुभव के बिना ड्रोन हमलों के खिलाफ पूरी तरह प्रभावी नहीं हो सकते। यूक्रेन के सुरक्षा सचिव रुस्तम उमेरोव ने इन देशों का दौरा कर लंबी अवधि के सुरक्षा सहयोग पर चर्चा की है।
यूक्रेन की इस सैन्य तैनाती से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
यूक्रेन ने इस मिशन के लिए अपने बेहतरीन तकनीशियन और सैन्य ऑपरेटरों को तैनात किया है। इससे जुड़ी मुख्य जानकारियां नीचे दी गई हैं:
- विशेषज्ञों की संख्या: अब तक लगभग 228 यूक्रेनी विशेषज्ञों को पांच देशों में भेजा गया है।
- मुख्य लक्ष्य: ईरानी मूल के शाहेद (Shahed) ड्रोन्स को हवा में ही मार गिराना।
- हथियारों का आदान-प्रदान: यूक्रेन इस मदद के बदले PAC-2 और PAC-3 एयर डिफेंस मिसाइलें हासिल करने की कोशिश में है।
- सफलता: हाल के दिनों में इन विशेषज्ञों ने इंटरसेप्टर ड्रोन्स का इस्तेमाल कर कई हमले नाकाम किए हैं।
- अमेरिका की भूमिका: अमेरिका ने भी अपने सैन्य ठिकानों की सुरक्षा के लिए यूक्रेन से मदद मांगी है।
प्रवासियों और आम जनता के लिए इस खबर के मायने
सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों में काम करने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए सुरक्षा व्यवस्था का मजबूत होना एक राहत भरी खबर है। तेल क्षेत्रों और रिहायशी इलाकों के पास होने वाले ड्रोन हमलों से अक्सर काम-काज और उड़ानों पर असर पड़ता था। यूक्रेन के विशेषज्ञों की मौजूदगी से इन देशों का एयर डिफेंस सिस्टम और भी सटीक तरीके से काम करेगा, जिससे वहां रहने वाले लोगों और अक्सर यात्रा करने वाले प्रवासियों के लिए खतरा कम होगा।




