ईरान ने अमेरिका के 15 सूत्री प्रस्ताव पर दिया आधिकारिक जवाब, खाड़ी क्षेत्र में तनाव के बीच बड़ी हलचल
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ी खबर आई है। ईरान ने अमेरिका की ओर से दिए गए 15 सूत्री प्रस्ताव पर अपना आधिकारिक जवाब दे दिया है। यह प्रस्ताव पाकिस्तान के जरिए ईरान तक पहुंचाया गया था। ईरानी मीडिया ने 26 मार्च 2026 को इस बात की पुष्टि की है कि तेहरान ने अपना जवाब दर्ज करा दिया है। इस प्रस्ताव में परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़ी कई कड़ी शर्तें शामिल थीं।
अमेरिका के प्रस्ताव में क्या मुख्य शर्तें रखी गई थीं?
अमेरिका की ओर से भेजे गए इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य ईरान की सैन्य और परमाणु गतिविधियों पर लगाम लगाना है। इसमें ईरान से अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह बंद करने और यूरेनियम के भंडार को सौंपने की मांग की गई है। इसके अलावा प्रस्ताव में निम्नलिखित बिंदु भी शामिल हैं।
- ईरान अपनी मिसाइल क्षमता को सीमित करे।
- क्षेत्रीय सहयोगियों यानी ‘एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’ को समर्थन देना बंद किया जाए।
- Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित और स्वतंत्र बनाया जाए।
- बातचीत के लिए एक महीने के युद्धविराम का पालन हो।
ईरान का इस मामले पर क्या रुख है?
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्छी ने साफ किया है कि ईरान का अमेरिका के साथ सीधी बातचीत का कोई इरादा नहीं है। ईरान इसे बातचीत नहीं बल्कि केवल संदेशों का आदान-प्रदान मान रहा है। ईरान ने अपनी तरफ से कुछ कड़ी शर्तें भी रखी हैं जिन्हें पूरा करने के बाद ही शांति संभव है।
| ईरान की प्रमुख मांगें | विवरण |
|---|---|
| प्रतिबंध | आर्थिक प्रतिबंधों को पूरी तरह हटाया जाए। |
| हर्जाना | युद्ध और हमलों के कारण हुए नुकसान की भरपाई की जाए। |
| सुरक्षा गारंटी | भविष्य में अमेरिकी हमलों के खिलाफ ठोस गारंटी मिले। |
| संप्रभुता | Strait of Hormuz पर ईरान के अधिकारों को मान्यता दी जाए। |
क्षेत्र के ताजा हालात और सैन्य गतिविधियां
एक तरफ जहां कूटनीतिक संदेश भेजे जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ तनाव कम होता नहीं दिख रहा है। इजरायल ने दावा किया है कि उसने 26 मार्च को एक हवाई हमले में ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड नेवी के नेता अलीरेजा तंगसिरी को मार गिराया है। दूसरी ओर अमेरिका का रक्षा विभाग पेंटागन खाड़ी क्षेत्र में हजारों अतिरिक्त सैनिकों को तैनात करने की योजना बना रहा है। खाड़ी में रहने वाले भारतीयों और अन्य प्रवासियों के लिए यह स्थिति काफी संवेदनशील बनी हुई है क्योंकि इससे समुद्री रास्तों और उड़ानों पर असर पड़ सकता है।




