इजरायल के हाइफा पोर्ट पर ईरान का बड़ा हमला, खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी बनाया निशाना
ईरान और इजरायल के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। ईरानी सेना और IRGC ने इजरायल के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण Haifa पोर्ट पर बुधवार देर रात ड्रोन और मिसाइलों से हमला किया है। ईरानी मीडिया Press TV के अनुसार, यह कार्रवाई अमेरिका और इजरायल के पुराने हमलों का बदला लेने के लिए की गई है। इस हमले के साथ ही ईरान ने खाड़ी के कई देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाने का दावा किया है, जिससे पूरे क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
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ईरानी हमले में किन ठिकानों को बनाया गया निशाना?
ईरानी सेना ने बताया कि उन्होंने Haifa पोर्ट में उन जगहों को चुना जो इजरायल के लिए सैन्य रूप से बहुत खास हैं। इसमें सैन्य जहाजों के रखरखाव की जगह और फाइटर जेट्स के लिए रखे गए फ्यूल टैंक शामिल हैं। IRGC ने इसे ‘Operation True Promise 4’ का नाम दिया है और कुल 220 हमले करने का दावा किया है।
| निशाना बनाया गया इलाका | स्थान | टारगेट का प्रकार |
|---|---|---|
| Haifa Port | Israel | ईंधन टैंक और सैन्य जहाज सुविधा |
| Al Dhafra | UAE | अमेरिकी सैन्य ठिकाना |
| Ali Al Salem & Arifjan | Kuwait | अमेरिकी सैन्य ठिकाना |
| Al Kharj | Saudi Arabia | अमेरिकी सैन्य ठिकाना |
खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और सुरक्षा पर क्या होगा असर?
इस सैन्य कार्रवाई की खबर के बाद UAE, कुवैत और सऊदी अरब में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के बीच हलचल है। ईरान ने साफ कहा है कि उसने इन देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। हालांकि, इजरायल के रक्षा मंत्री Israel Katz ने दावा किया है कि उन्होंने एक जवाबी हमले में ईरानी नौसेना के कमांडर Alireza Tangsiri को मार गिराया है, लेकिन ईरान ने अभी इसकी पुष्टि नहीं की है।
- सुरक्षा अलर्ट: खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर हुए हमलों से प्रवासियों में चिंता है।
- हवाई यातायात: तनाव बढ़ने से आने वाले दिनों में उड़ानों के रूट में बदलाव हो सकता है।
- आधिकारिक बयान: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिलहाल ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमला न करने का फैसला 6 अप्रैल तक बढ़ा दिया है।
- सहयोगी गुट: ईरान के साथ Hezbollah और इराक के सशस्त्र समूहों ने भी इस बड़े हमले में साथ दिया है।
ईरान ने अमेरिका के 15 सूत्रीय युद्धविराम प्रस्ताव को भी ठुकरा दिया है। अभी स्थिति काफी तनावपूर्ण बनी हुई है और दोनों तरफ से सेनाएं अलर्ट पर हैं। खाड़ी में काम करने वाले भारतीयों को सलाह दी जाती है कि वे स्थानीय खबरों और आधिकारिक सूचनाओं पर नजर बनाए रखें।




