Iran US News Update: ईरान ने अमेरिका से बातचीत की खबरों को किया खारिज, शांति के लिए रखी कड़ी शर्तें
ईरान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साफ कर दिया है कि उसकी अमेरिका के साथ कोई सीधी बातचीत नहीं हो रही है। इस्लामाबाद में ईरान के राजदूत रज़ा अमीरी मोघदाम ने कहा कि जब तक हमलावर देश अपनी कार्रवाई पूरी तरह बंद नहीं करते, तब तक युद्ध खत्म नहीं होगा। यह जानकारी ऐसे समय में आई है जब अमेरिका की तरफ से बातचीत के दावे किए जा रहे थे, जिससे खाड़ी क्षेत्र में उलझन की स्थिति बनी हुई थी।
ईरान ने बातचीत की खबरों पर क्या कहा?
ईरान के राजदूत ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका के साथ किसी भी तरह की सीधी या परोक्ष बातचीत नहीं चल रही है। यह बयान डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे के जवाब में आया है जिसमें उन्होंने बातचीत को सकारात्मक बताया था। हालांकि, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची ने माना कि बिचौलियों के माध्यम से संदेशों का आदान-प्रदान जरूर हो रहा है, लेकिन वे इसे कोई औपचारिक बातचीत या समझौता नहीं मानते हैं। पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने भी पुष्टि की है कि उनका देश दोनों देशों के बीच संदेश पहुंचाने के लिए एक कड़ी के रूप में काम कर रहा है।
शांति के लिए ईरान की मुख्य शर्तें क्या हैं?
ईरान ने युद्ध को पूरी तरह समाप्त करने के लिए कुछ कड़े नियम और शर्तें रखी हैं। इन शर्तों को पूरा किए बिना क्षेत्र में स्थिरता आना मुश्किल है। ईरान ने अपनी मांगों की सूची में युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई और संप्रभुता को प्रमुखता दी है।
| शर्त का नाम | विवरण |
|---|---|
| मुआवजा | अमेरिका और इजराइल को युद्ध के कारण हुए नुकसान की भरपाई करनी होगी |
| हमलों पर रोक | लेबनान के खिलाफ इजरायली हमलों को पूरी तरह और हमेशा के लिए बंद करना होगा |
| जल सीमा | हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की पूरी संप्रभुता को मान्यता देनी होगी |
खाड़ी क्षेत्र और अमेरिका के दावों में क्या अंतर है?
डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि बातचीत जारी है और उन्होंने ईरान की अपील पर हमलों को 6 अप्रैल 2026 तक के लिए टाल दिया है। लेकिन ईरान की सरकारी न्यूज़ एजेंसी IRNA ने बताया है कि तेहरान ने व्हाइट हाउस के 15-सूत्रीय प्रस्ताव को पूरी तरह से ठुकरा दिया है। यह विरोधाभास बताता है कि दोनों देशों के बीच अविश्वास काफी गहरा है। खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और व्यापारिक गतिविधियों के लिए यह स्थिति महत्वपूर्ण है क्योंकि क्षेत्रीय सुरक्षा सीधे तौर पर इन देशों की स्थिरता से जुड़ी हुई है।




