भारत ने चीन जा रहा ईरानी गैस टैंकर ‘औरोरा’ को बीच रास्ते में ही खरीदा, आज पहुंचेगा मंगलुरु
भारत ने एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए चीन जा रहे ईरानी गैस टैंकर ‘औरोरा’ को बीच रास्ते में ही खरीद लिया है. यह टैंकर आज, गुरुवार 27 मार्च 2026 को कर्नाटक के मंगलुरु तट पर पहुंचने वाला है. यह खरीद भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए काफी अहम मानी जा रही है, खासकर 2019 के बाद यह ईरान से एलपीजी की भारत की पहली बड़ी खरीद है. इस सौदे से देश में एलपीजी की आपूर्ति मजबूत होने की उम्मीद है.
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भारत ने ईरान से कब और क्यों खरीदी गैस?
यह खरीद ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका ने ईरान के तेल और रिफाइंड ईंधन पर लगे प्रतिबंधों को अस्थायी रूप से 30 दिनों के लिए हटाया है. भारत ने पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के दबाव के कारण 2019 से ईरान से ऊर्जा खरीदना बंद कर दिया था. इस डील की घोषणा 25-26 मार्च 2026 को की गई थी. केंद्रीय जहाजरानी मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने 25 मार्च 2026 को कहा था कि उन्हें ईरान से किसी भी लोड किए गए कार्गो की जानकारी नहीं है, लेकिन भारत सरकार ने यह डील अब पूरी कर ली है.
कौन-कौन सी कंपनियां इस डील में शामिल हैं और भुगतान कैसे होगा?
इस सौदे में भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की ईंधन खुदरा विक्रेता कंपनियां इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL), और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (HPCL) प्रमुख खरीदार हैं. ईरान इस गैस का विक्रेता है. ‘औरोरा’ नाम का यह टैंकर, जो पहले चीन की ओर जा रहा था, अब भारत के मंगलुरु बंदरगाह पर आएगा. रिपोर्ट के अनुसार, इस खरीद का भुगतान भारतीय रुपये (INR) में किया जाएगा, जिससे दोनों देशों के व्यापार में आसानी होगी.
इस डील का क्या है खास असर?
इस खरीद को भारत में एलपीजी की मौजूदा कमी को पूरा करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. ईरान-इजरायल युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में ऊर्जा शिपमेंट में बाधा आने से भारत में एलपीजी की आपूर्ति प्रभावित हुई थी. भारत आगे भी ईरानी एलपीजी कार्गो खरीदने पर विचार कर रहा है, जो देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और आयात स्रोतों में विविधता लाने में मदद करेगा. यह कदम भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा.




