ईरान के बुशहर में सैन्य ठिकानों पर हमला, परमाणु प्लांट के पास गिरे प्रोजेक्टाइल से दुनिया भर में बढ़ी चिंता
ईरान के बुशहर प्रांत में पिछले कुछ दिनों से सैन्य गतिविधियां काफी तेज हो गई हैं। 27 मार्च 2026 को आई खबरों के मुताबिक, वहां मौजूद इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के ठिकानों को निशाना बनाया गया है। बताया जा रहा है कि इन हमलों में नेवल और एयर इंफ्रास्ट्रक्चर को काफी नुकसान पहुंचा है। बुशहर का यह इलाका फारस की खाड़ी पर कंट्रोल रखने के लिए बहुत अहम माना जाता है। इस बीच परमाणु प्लांट के पास हुए हमलों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
बुशहर में किन ठिकानों को पहुंचा नुकसान?
रिपोर्ट्स के अनुसार, बुशहर प्रांत में आईआरजीसी के चौथे सारल्लाह नेवल डिस्ट्रिक्ट के ठिकानों पर हमले हुए हैं। इन हमलों से जुड़े कुछ मुख्य घटनाक्रम नीचे दिए गए हैं:
| तारीख (2026) | मुख्य घटना |
|---|---|
| 23 मार्च | चमरान मिसाइल बेस पर हमला हुआ |
| 24 मार्च | बुशहर नेवल बेस पर हवाई हमला हुआ |
| 26 मार्च | नेवी कमांडर रियर एडमिरल अलीरेज़ा तंगसिरी की मौत की खबर आई |
| 27 मार्च | सैटेलाइट तस्वीरों में नेवल इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान दिखा |
इन हमलों के पीछे अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सेना का हाथ बताया जा रहा है। ईरानी मीडिया के अनुसार, हमलों का उद्देश्य ईरान की मिसाइल क्षमता और डिफेंस सिस्टम को कमजोर करना है। इसके अलावा आईआरजीसी में अब 12 साल की उम्र से ही भर्ती शुरू करने की खबरें भी आ रही हैं, क्योंकि उन्हें नए जवानों की कमी का सामना करना पड़ रहा है और उनके ऑपरेशन में दिक्कतें आ रही हैं।
परमाणु प्लांट की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
बुशहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र को लेकर दुनिया भर में चिंता का माहौल है। 24 और 25 मार्च को इस प्लांट के परिसर में प्रोजेक्टाइल गिरने की खबरें आई थीं। हालांकि, ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन ने स्पष्ट किया है कि इससे प्लांट के किसी भी हिस्से को कोई नुकसान नहीं हुआ है और सभी कर्मचारी सुरक्षित हैं। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने भी इसकी पुष्टि की है कि प्लांट सुरक्षित है।
- IAEA की चेतावनी: एजेंसी के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने चेतावनी दी है कि परमाणु ठिकानों के पास सैन्य कार्रवाई से बड़ा खतरा पैदा हो सकता है।
- ईरान का जवाब: ईरान ने इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन बताते हुए ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4’ के तहत अमेरिकी और इजरायली ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से जवाबी हमले किए हैं।
- अमेरिका का रुख: राष्ट्रपति ट्रंप ने ऊर्जा ठिकानों पर हमलों में दस दिनों की राहत देने की बात कही है, लेकिन सैन्य और मिसाइल ठिकानों पर हमले जारी रहने के संकेत दिए हैं।
ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन का कहना है कि शांत परमाणु केंद्रों पर हमला क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरनाक नतीजे ला सकता है। फिलहाल दोनों तरफ से मिसाइल और ड्रोन हमलों का दौर जारी है जिससे इलाके में तनाव कम होता नहीं दिख रहा है।




