Strait of Hormuz में तनाव: ईरान ने भारत और चीन के जहाजों को दी छूट, ट्रंप ने बढ़ाई हमले की समय सीमा
अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को अब चार हफ्ते बीत चुके हैं। इस संघर्ष की वजह से Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही पर बहुत बुरा असर पड़ा है, जिससे दुनिया भर के तेल और गैस बाजार में तनाव बढ़ गया है। हालांकि, तनाव के बीच ईरान ने भारत सहित कुछ मित्र देशों के जहाजों को राहत देने का फैसला किया है। दूसरी तरफ, अमेरिका ने ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर होने वाले हमलों की डेडलाइन को कुछ दिनों के लिए आगे बढ़ा दिया है ताकि बातचीत का रास्ता खुला रहे।
किन देशों के जहाजों को मिली Strait of Hormuz से गुजरने की अनुमति?
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने आधिकारिक तौर पर उन देशों के नाम बताए हैं जिनके जहाजों को Strait of Hormuz से गुजरने में कोई रुकावट नहीं आएगी। ईरान ने समुद्री रास्ते के लिए कड़े नियम बनाए हैं लेकिन अपने सहयोगी देशों को इसमें रियायत दी है।
- भारत और चीन: भारतीय और चीनी जहाजों को इस रास्ते से सुरक्षित गुजरने की इजाजत मिली है।
- रूस और पाकिस्तान: रूस और पाकिस्तान के जहाजों पर भी ईरान कोई पाबंदी नहीं लगाएगा।
- इराक: इराक के जहाजों को भी इस लिस्ट में शामिल किया गया है।
- नियम: इन देशों के जहाजों को ट्रांजिट के दौरान ईरान की सेना (IRGC) के साथ तालमेल बिठाना होगा।
- प्रतिबंध: अमेरिका, इस्राइल और उनके सहयोगी देशों के जहाजों के लिए यह रास्ता पूरी तरह बंद रहेगा।
तेल की सप्लाई और पाइपलाइन का क्या है हाल?
Strait of Hormuz से रोजाना लगभग 2 करोड़ बैरल तेल गुजरता है। इस रास्ते में रुकावट आने से तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। दुनिया भर में तेल की कमी न हो, इसके लिए तीन प्रमुख पाइपलाइनों को विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
| पाइपलाइन का नाम | देश | क्षमता (प्रति दिन) |
|---|---|---|
| Saudi East-West Pipeline | Saudi Arabia | 50 से 70 लाख बैरल |
| Habshan-Fujairah Pipeline | UAE | 15 से 18 लाख बैरल |
| Kirkuk-Ceyhan Pipeline | Iraq | 16 लाख बैरल |
हालांकि ये पाइपलाइनें तेल पहुंचाने में मदद कर रही हैं, लेकिन ये Strait of Hormuz से होने वाली कुल सप्लाई की बराबरी नहीं कर सकतीं। इसी संकट को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने अपने इमरजेंसी रिजर्व से 40 करोड़ बैरल तेल छोड़ने का फैसला किया है।
शांति वार्ता और ट्रंप का नया फैसला क्या है?
युद्ध के बीच शांति की कोशिशें भी जारी हैं। पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र जैसे देश दोनों पक्षों के बीच बातचीत करवाने की कोशिश कर रहे हैं। अमेरिका ने ईरान के सामने 15 शर्तों का एक प्रस्ताव रखा है, जिसमें परमाणु कार्यक्रम बंद करने और समुद्री रास्ते को खुला रखने जैसी मांगें शामिल हैं।
इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर होने वाले हमलों को 6 अप्रैल तक के लिए टाल दिया है। पहले यह समय सीमा मार्च के अंत तक थी। ट्रंप का कहना है कि शांति वार्ता अच्छी दिशा में आगे बढ़ रही है, इसलिए 10 दिनों की और मोहलत दी गई है। हालांकि, इस बीच इस्राइल ने तेहरान में कुछ बुनियादी ढांचों पर हमले किए हैं जिससे स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है।




