ईरान का बड़ा फैसला, Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों को अब देना होगा भारी टैक्स, अमेरिका ने दी चेतावनी
ईरान अब Strait of Hormuz से गुजरने वाले विदेशी जहाजों पर टैक्स लगाने की तैयारी कर रहा है। अमेरिका के विदेश मंत्री Marco Rubio ने फ्रांस में हुई G7 बैठक के दौरान इस पर गहरी चिंता जताई है। सऊदी अरब के न्यूज सोर्स और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान इस जलमार्ग की सुरक्षा के नाम पर जहाजों से पैसा वसूलना चाहता है। इस फैसले का सीधा असर दुनियाभर की शिपिंग इंडस्ट्री और तेल की कीमतों पर पड़ सकता है क्योंकि यह एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक रास्ता है।
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ईरान क्यों वसूलना चाहता है जहाजों से ट्रांजिट फीस?
ईरान की संसद एक नया कानून तैयार कर रही है जिससे Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों से आधिकारिक तौर पर फीस ली जा सके। ईरानी अधिकारियों का तर्क है कि वे इस इलाके में सुरक्षा मुहैया कराते हैं, इसलिए जहाजों से पैसा लेना उनका हक है। खबरों के मुताबिक, कुछ जहाजों से 20 लाख डॉलर तक की भारी रकम वसूलने की योजना है।
- ईरान ने चीन, रूस, भारत, पाकिस्तान और इराक जैसे देशों के जहाजों को तालमेल के बाद रास्ता देने की बात कही है।
- बाकी देशों के जहाजों के लिए इस रास्ते का इस्तेमाल करना अब बहुत महंगा साबित हो सकता है।
- ईरानी सांसद Mohammadreza Rezaei Kouchi ने कहा कि सुरक्षा के बदले फीस लेना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है।
- दुनियाभर की शिपिंग कंपनियां इस नए नियम से काफी दबाव में नजर आ रही हैं।
अमेरिका और भारत सहित दुनिया के अन्य देशों की क्या है राय?
अमेरिका और खाड़ी देशों के संगठन GCC ने ईरान के इस कदम को अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून यानी UNCLOS का उल्लंघन बताया है। उनका कहना है कि Strait of Hormuz एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है और यहां किसी भी देश को रास्ता रोकने या टैक्स वसूलने का अधिकार नहीं है।
| देश/संगठन | मुख्य प्रतिक्रिया |
|---|---|
| United States | Marco Rubio ने इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन बताया और नौवहन की स्वतंत्रता की मांग की। |
| India | भारत ने साफ किया है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत कोई भी देश जलमार्ग पर टैक्स नहीं लगा सकता। |
| GCC | खाड़ी देशों ने इसे अवैध बताते हुए संयुक्त राष्ट्र के नियमों का हवाला दिया है। |
| G7 Nations | G7 देशों ने मिलकर ईरान से तुरंत जहाजों की आवाजाही सामान्य करने की अपील की है। |
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के लिए अपनी समय सीमा 6 अप्रैल तक बढ़ा दी है ताकि बातचीत के जरिए इस संकट का समाधान निकाला जा सके। खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और वहां से होने वाले व्यापार पर भी इसका गहरा असर पड़ सकता है क्योंकि ट्रांसपोर्टेशन महंगा होने से जरूरी चीजों के दाम बढ़ सकते हैं।




