सऊदी, तुर्की और मिस्र के विदेश मंत्री पहुंच रहे इस्लामाबाद, मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध को रोकने के लिए होगी अहम बातचीत
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान के इस्लामाबाद में 29 और 30 मार्च 2026 को एक बड़ी क्षेत्रीय बैठक आयोजित की जा रही है। इस चार-पक्षीय बैठक में सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र के विदेश मंत्री हिस्सा लेंगे। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस चर्चा का मुख्य मकसद क्षेत्र में कूटनीतिक कोशिशों को तेज करना और राजनीतिक समाधान निकालना है। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब खाड़ी देशों में सुरक्षा की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
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बैठक का मुख्य एजेंडा और शांति की कोशिशें क्या हैं?
पाकिस्तान इस समय अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है ताकि क्षेत्र में जारी संघर्ष को रोका जा सके। डिप्टी पीएम और विदेश मंत्री इशाक डार ने पुष्टि की है कि पाकिस्तान के जरिए अमेरिका और ईरान के बीच संदेशों का आदान-प्रदान हो रहा है। तुर्की और मिस्र भी इस शांति प्रक्रिया में पाकिस्तान का साथ दे रहे हैं। बैठक में 15 सूत्रीय अमेरिकी ढांचे पर भी विचार किया जा सकता है, जो ईरान के साथ बातचीत का आधार बन सकता है।
इस बैठक में शामिल होने वाले देश और मुख्य मुद्दे
क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए इस बैठक में कई महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर चर्चा होगी। इसकी पूरी जानकारी नीचे दी गई है:
- मेजबान देश: बैठक की मेजबानी पाकिस्तान कर रहा है।
- मुख्य प्रतिभागी: सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र के विदेश मंत्री इसमें शामिल होंगे।
- ताजा सुरक्षा संकट: हाल ही में कुवैत के अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट और अन्य जगहों पर ड्रोन हमले हुए हैं, जिससे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है।
- मध्यस्थता: पाकिस्तान चीन के साथ मिलकर भी तनाव कम करने की कोशिशों में लगा है।
- कुवैत का रुख: कुवैत ने ईरान की गतिविधियों पर चिंता जताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कड़ा कदम उठाने की मांग की है।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा है कि पाकिस्तान क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए रचनात्मक भूमिका निभाता रहेगा। इस्लामाबाद ने अमेरिका और ईरान के बीच सीधी बातचीत के लिए भी जगह देने की पेशकश की है। भारतीय प्रवासियों और खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि इस शांति वार्ता का सीधा असर मिडिल ईस्ट की सुरक्षा और वहां की उड़ानों पर पड़ सकता है।




