Israel Lebanon Conflict: इज़राइल ने दक्षिणी लेबनान के 7 गांवों को खाली करने का दिया आदेश, लोगों को उत्तर जाने का फरमान
इज़राइली सेना (IDF) ने दक्षिणी लेबनान में रहने वाले आम लोगों के लिए एक नया और सख्त आदेश जारी किया है। इसमें सात गाँवों के निवासियों को तुरंत अपना घर छोड़कर उत्तर की तरफ जाने के लिए कहा गया है। यह फैसला सीमा पर बढ़ते तनाव और सैन्य गतिविधियों के बीच लिया गया है। इस आदेश के बाद हज़ारों लोग अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित ठिकानों की तलाश में निकल पड़े हैं। लेबनान के राष्ट्रपति ने इज़राइल के इन कदमों को ज़मीनी हमले की शुरुआत बताया है।
किन गाँवों और इलाकों पर पड़ेगा इसका असर?
इज़राइली सेना के प्रवक्ता Col. Avichay Adraee ने सोशल मीडिया पर इस चेतावनी की जानकारी दी है। आदेश के मुताबिक Rashidieh, al-Bas और Wadi Jilo जैसे गाँवों के लोगों को Zahrani River के उत्तर में जाने को कहा गया है। इज़राइल का कहना है कि वे इन इलाकों में Hezbollah के ठिकानों को निशाना बना रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में सीमावर्ती इलाकों में गोलाबारी और हवाई हमलों में काफी तेज़ी देखी गई है जिससे आम नागरिकों की सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया है।
लेबनान में मौजूदा स्थिति और नुकसान की जानकारी
| विवरण | ताज़ा आंकड़े (मार्च 2026) |
|---|---|
| कुल विस्थापित लोग | 10 लाख से अधिक |
| बच्चों का विस्थापन | 19,000 बच्चे प्रतिदिन (औसत) |
| पिछले 24 घंटे में मौतें | 26 लोग |
| कुल घायलों की संख्या | 3,315 लोग |
| कुल मौतें (2 मार्च से) | 1,142 लोग |
संयुक्त राष्ट्र (UN) और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने इन आदेशों पर चिंता जताई है। UNICEF के अनुसार हर दिन हज़ारों बच्चे अपने घरों से दूर जा रहे हैं जिससे उनकी शिक्षा और स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। लेबनान के स्वास्थ्य विभाग के अनुसार हमलों में घायलों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है। दक्षिणी लेबनान के कई इलाकों में बिजली और पानी की सप्लाई भी पूरी तरह ठप हो गई है।
इज़राइल और लेबनान सरकार का क्या है कहना?
इज़राइल के रक्षा मंत्री Israel Katz ने साफ किया है कि उनकी सेना Litani River तक के इलाके को एक सुरक्षित बफर ज़ोन बनाना चाहती है। वहीं दूसरी ओर लेबनान सरकार ने इसे अपनी ज़मीन पर कब्ज़ा करने और भौगोलिक संपर्क तोड़ने की कोशिश करार दिया है। Hezbollah के नेताओं ने भी किसी भी तरह के दबाव में बातचीत करने या झुकने से मना कर दिया है। सीमा के पास बने स्कूलों और अस्पतालों पर भी हमलों की खबरें आई हैं जिससे राहत कार्यों में मुश्किल हो रही है।




