West Asia Crisis: रक्षा मंत्री Rajnath Singh की अध्यक्षता में आज होगी मंत्रियों की पहली बैठक, पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर रहेगी नजर
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को देखते हुए भारत सरकार ने बड़ी तैयारी शुरू कर दी है। रक्षा मंत्री Rajnath Singh आज शनिवार शाम 4 बजे मंत्रियों के एक अनौपचारिक समूह की पहली बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य युद्ध की वजह से पैदा होने वाली चुनौतियों का समाधान करना और देश की तैयारियों की समीक्षा करना है। सरकार इस संकट के प्रभाव को कम करने के लिए लगातार काम कर रही है।
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इस बैठक में कौन से बड़े मंत्री शामिल होंगे?
इस अनौपचारिक बैठक में देश के कई बड़े मंत्रालयों के प्रमुख हिस्सा लेंगे। इस समूह का गठन शुक्रवार को ही किया गया है ताकि पश्चिम एशिया की स्थिति पर बारीकी से नजर रखी जा सके। बैठक में शामिल होने वाले मुख्य सदस्यों की सूची इस प्रकार है:
| मंत्री का नाम | विभाग/मंत्रालय |
|---|---|
| Rajnath Singh | रक्षा मंत्री (अध्यक्ष) |
| Amit Shah | गृह मंत्री |
| Nirmala Sitharaman | वित्त मंत्री |
| Hardeep Singh Puri | पेट्रोलियम मंत्री |
इन मंत्रियों के अलावा कुछ अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस चर्चा का हिस्सा बनेंगे। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने भी इससे पहले शुक्रवार को सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों और उपराज्यपालों के साथ वर्चुअल बैठक की थी। उन्होंने इस स्थिति को भारत के लिए एक बड़ी परीक्षा बताया और सभी को सतर्क रहने की सलाह दी है।
पश्चिम एशिया संकट को लेकर अब तक क्या कदम उठाए गए हैं?
सरकार का मुख्य ध्यान इस बात पर है कि इस अंतरराष्ट्रीय संकट का असर भारत की आम जनता और अर्थव्यवस्था पर न पड़े। रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने बताया कि सरकार LPG की उपलब्धता सुनिश्चित करने और पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले टैक्स को कम करने जैसे जरूरी कदम उठा रही है। इसके साथ ही विदेश मंत्रालय भी वहां रहने वाले भारतीय नागरिकों की मदद के लिए लगातार काम कर रहा है।
- 3 मार्च 2026 से ही एक इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप रोजाना स्थिति की समीक्षा कर रहा है।
- विदेश सचिव Vikram Misri ने 25 मार्च को सर्वदलीय बैठक में मौजूदा हालात की जानकारी दी थी।
- राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एकजुट होकर काम करने के निर्देश दिए गए हैं।
- ईंधन की कीमतों को काबू में रखने के लिए उत्पाद शुल्क में कटौती की बात कही गई है।
पश्चिम एशिया में यह तनाव 28 फरवरी से शुरू हुआ था और अब इसे चार हफ्ते बीत चुके हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि बदलती हुई परिस्थितियों के हिसाब से नई रणनीतियां बनाई जा रही हैं ताकि आपूर्ति श्रृंखला में कोई बाधा न आए।




