कुवैत एयरपोर्ट पर ड्रोन हमला, 58 घंटे की मशक्कत के बाद बुझी आग, रडार सिस्टम हुआ खराब
कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुए ड्रोन हमलों के बाद प्रशासन ने सुरक्षा बढ़ा दी है। मार्च 2026 के आखिरी हफ्ते में हुए इन हमलों से एयरपोर्ट के फ्यूल टैंक में भीषण आग लग गई थी, जिसे बुझाने में कुवैत फायर फोर्स (KFF) और सेना की टीमों को 58 घंटे का लंबा समय लगा। कुवैत आर्मी, नेशनल गार्ड और तेल क्षेत्र की अग्निशमन इकाइयों ने मिलकर इस आग पर काबू पाया है। इन हमलों की वजह से एयरपोर्ट के रडार सिस्टम को भी काफी नुकसान पहुंचा है, जिससे विमानों की आवाजाही पर असर पड़ने की संभावना है।
ड्रोन हमलों से क्या-क्या नुकसान हुआ है?
कुवैत के नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के प्रवक्ता अब्दुल्ला अल-राजी ने बताया है कि इन हमलों में किसी व्यक्ति के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन सरकारी संपत्ति को भारी क्षति पहुंची है। शनिवार 28 मार्च को हुए हमले में एयरपोर्ट के रडार सिस्टम को निशाना बनाया गया जिससे वह बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इससे पहले 25 मार्च को फ्यूल डिपो पर हमला हुआ था जिसके बाद आग की लपटें काफी दूर तक देखी गईं। इसके अलावा कुवैत के शुवैख पोर्ट और मुबारक अल-कबीर पोर्ट पर भी ड्रोन और मिसाइल गिरने से नुकसान की खबरें आई हैं। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और रडार को ठीक करने का काम जारी है।
प्रवासियों और यात्रियों के लिए जरूरी निर्देश
कुवैत में रहने वाले भारतीय प्रवासियों और अक्सर यात्रा करने वाले लोगों के लिए प्रशासन ने कुछ जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए हैं, ताकि किसी भी तरह की परेशानी से बचा जा सके:
- सुरक्षा सावधानी: ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद अल-गरीब ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी आपात स्थिति या संदिग्ध वस्तु की सूचना तुरंत 112 नंबर पर दें।
- फ्लाइट स्टेटस: रडार सिस्टम को नुकसान पहुंचने की वजह से यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे एयरपोर्ट जाने से पहले अपनी एयरलाइन से संपर्क करें।
- सरकारी निगरानी: प्रधानमंत्री शेख अहमद अब्दुल्ला अल-अहमद अल-सबाह ने खुद प्रभावित इलाकों का दौरा कर सुरक्षा इंतजामों की तारीफ की है।
- वायु सेना का एक्शन: कुवैती एयर डिफेंस ने हाल ही में 4 बैलिस्टिक मिसाइल और 3 ड्रोन को कुवैती हवाई क्षेत्र में मार गिराया है।
- डिप्लोमेटिक विरोध: कुवैत के विदेश मंत्रालय ने ईरानी राजदूत को बुलाकर इस घटना पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है और इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया है।




