Strait of Hormuz: ईरान ने जहाजों पर लगाया 2 मिलियन डॉलर का टैक्स, खाड़ी देशों ने बताया अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन
हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों पर ईरान द्वारा लगभग 2 मिलियन डॉलर का भारी शुल्क लगाने का मामला गरमा गया है। कुवैत के आर्थिक विशेषज्ञों और खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) ने ईरान के इस कदम को अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का खुला उल्लंघन करार दिया है। ईरान का दावा है कि वह इस क्षेत्र में सुरक्षा प्रदान करने के बदले यह पैसा ले रहा है, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इसे ‘आर्थिक आतंकवाद’ के रूप में देख रहा है। इस विवाद की वजह से समुद्र में हजारों जहाज फंसे हुए हैं और समुद्री बीमा की दरों में भी काफी बढ़ोतरी हुई है।
ईरान के इस नए टैक्स से क्या मुश्किलें खड़ी हुई हैं?
ईरान द्वारा लगाए गए इस देय शुल्क और पाबंदियों का असर पूरी दुनिया के व्यापार और समुद्री आवाजाही पर पड़ रहा है। इस समय लगभग 3,200 जहाज खाड़ी क्षेत्र में फंसे हुए हैं, जिससे सामान की सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है। ईरान ने कुछ चुनिंदा देशों के जहाजों को ही वहां से गुजरने की अनुमति देने की बात कही है।
- ईरान ने चीन, रूस, भारत, पाकिस्तान, इराक और बांग्लादेश के जहाजों को ही समन्वय के बाद गुजरने की अनुमति दी है।
- अमेरिका और इजरायल से जुड़े जहाजों के लिए रास्ता पूरी तरह से बंद या प्रतिबंधित करने का दावा किया गया है।
- ईरान की संसद अब इस 2 मिलियन डॉलर के शुल्क को कानूनी रूप देने के लिए नया कानून लाने की तैयारी कर रही है।
- भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और खाड़ी देशों के अधिकारियों ने नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखने की मांग की है।
अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार ईरान का फैसला कितना सही है?
संयुक्त राष्ट्र के समुद्री कानून (UNCLOS) के तहत, जो 1982 में बना था, किसी भी अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग से गुजरने के लिए कोई भी देश शुल्क नहीं वसूल सकता है। कुवैती आर्थिक विशेषज्ञ अहमद अल-सधान का कहना है कि ईरान के पास इस तरह का टैक्स लगाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के महासचिव जासिम मोहम्मद अल-बुदैवी ने भी इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन बताया है। ईरान का कहना है कि वर्तमान युद्ध की स्थिति और सुरक्षा के इंतजामों के कारण वे यह पैसा वसूल रहे हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) ने इस कदम की निंदा की है और नागरिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा है।
| मुख्य बिंदु | विवरण |
|---|---|
| प्रति जहाज शुल्क | 2 मिलियन डॉलर (करीब 16 करोड़ रुपये) |
| प्रभावित जहाज | लगभग 3,200 जहाज समुद्र में फंसे हैं |
| लागू कानून | UNCLOS (यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ द सी) |
| अनुमति वाले देश | भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, इराक, बांग्लादेश |
| विरोध करने वाले | GCC, भारत, कुवैत और अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन |




