ईरान के संसद अध्यक्ष का बड़ा बयान, कहा- युद्ध अब और भी संवेदनशील मोड़ पर पहुंचा
ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाक़र क़ालिबाफ़ (Mohammad Baqer Qalibaf) ने 29 मार्च 2026 को एक महत्वपूर्ण बयान जारी किया है। उन्होंने कहा है कि मौजूदा युद्ध अब अपने सबसे संवेदनशील और नाजुक मोड़ पर पहुँच गया है। क़ालिबाफ़ के अनुसार ईरान ने अब युद्ध के एक नए चरण में प्रवेश कर लिया है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में इज़राइल और अमेरिका के साथ तनाव काफी बढ़ गया है।
क़ालिबाफ़ ने अमेरिका और क्षेत्रीय देशों को क्या चेतावनी दी?
ईरानी संसद के स्पीकर ने अमेरिका को सीधी चेतावनी देते हुए कहा है कि वह ईरान की अपनी ज़मीन की रक्षा करने की हिम्मत और इरादे की परीक्षा न ले। उन्होंने उन खबरों पर भी प्रतिक्रिया दी जिनमें अमेरिका द्वारा मिडिल ईस्ट में अतिरिक्त सैनिकों और युद्धपोतों की तैनाती की बात कही गई थी। क़ालिबाफ़ ने कहा कि ईरान किसी भी हमले का मुँहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार है।
इसके साथ ही उन्होंने क्षेत्र के उन देशों को भी आगाह किया है जो ईरान के खिलाफ किसी साज़िश में शामिल हो सकते हैं। उन्होंने साफ़ लफ़्ज़ों में कहा कि अगर किसी क्षेत्रीय देश ने ईरान के किसी द्वीप पर कब्ज़ा करने में किसी बाहरी ताक़त की मदद की, तो ईरान उस देश के पूरे बुनियादी ढांचे को बिना किसी सीमा के निशाना बनाएगा।
ईरान की ओर से जारी किए गए ताज़ा अपडेट्स क्या हैं?
ईरान ने हाल के दिनों में कई कड़े रुख अपनाए हैं और अपनी रक्षा नीति में बदलाव के संकेत दिए हैं। इन मुख्य बिंदुओं को नीचे समझा जा सकता है:
- 18 मार्च 2026: ईरान ने अपने गैस फील्ड पर हमले के बाद आधिकारिक तौर पर युद्ध के नए चरण की शुरुआत की बात कही थी।
- बातचीत से इनकार: ईरान ने अमेरिका के साथ किसी भी गुप्त वार्ता या बातचीत की खबरों को पूरी तरह से गलत बताया है।
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: क़ालिबाफ़ ने साफ़ किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा की स्थिति अब पहले जैसी नहीं रहने वाली है।
- मिसाइल प्रोग्राम: ईरान अपनी मिसाइल क्षमताओं पर किसी भी तरह की पाबंदी लगाने के खिलाफ है और किसी भी चर्चा में नुकसान की भरपाई की मांग पर अड़ा है।
- मनोवैज्ञानिक युद्ध: ईरान सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म्स के ज़रिए अपनी बात मजबूती से रख रहा है और इज़राइल के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों का हवाला दे रहा है।
ईरान के इन बयानों का असर खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों और वहां के व्यापारिक माहौल पर भी पड़ सकता है। फिलहाल ईरान अपनी रक्षात्मक क्षमताओं को बढ़ाने और नई मिसाइल प्रणालियों को तैनात करने पर ज़ोर दे रहा है।




