Middle East में अमेरिका का बड़ा सैन्य एक्शन, F-22 रैप्टर विमानों ने ईरान के ठिकानों पर शुरू किए हमले
United States Air Force ने मिडिल ईस्ट में अपने सबसे आधुनिक लड़ाकू विमान F-22 रैप्टर को तैनात कर दिया है। यह तैनाती “Operation Epic Fury” के तहत की गई है, जिसका मकसद क्षेत्र में अमेरिकी हवाई ताकत को मजबूत करना है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि राष्ट्रपति के आदेश के बाद यह ऑपरेशन 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था। इन विमानों को दक्षिणी इजरायल के ओवडा एयर बेस पर रखा गया है, जहां से ये सीधे मिशन पर निकल रहे हैं।
ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के मुख्य लक्ष्य क्या हैं?
अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ के अनुसार, इस मिशन का उद्देश्य ईरान की हमलावर मिसाइल क्षमता और उनके उत्पादन केंद्रों को खत्म करना है। इस ऑपरेशन के तहत ईरानी नौसेना और अन्य सुरक्षा ढांचे को भी निशाना बनाया गया है ताकि वे परमाणु हथियार विकसित न कर सकें। 1 मार्च से 9 मार्च 2026 के बीच इन विमानों ने 200 से अधिक उड़ानें भरीं और ईरान के कई महत्वपूर्ण ठिकानों पर हमला किया।
- परमाणु केंद्र: नतान्ज़ और फोर्डो जैसे परमाणु ठिकानों पर सटीक हमले किए गए।
- मिसाइल साइट्स: आईआरजीसी (IRGC) के कमांड सेंटर और ड्रोन लॉन्च साइट्स को नष्ट किया गया।
- हवाई सुरक्षा: मिशन की शुरुआत में ही ईरान की S-300 और बावर-373 एयर डिफेंस सिस्टम को बेकार कर दिया गया।
F-22 रैप्टर की तैनाती से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां
इस पूरे मिशन में F-22 रैप्टर की भूमिका सबसे अहम रही क्योंकि इसकी स्टील्थ तकनीक के कारण ईरानी सेना इसे ट्रैक नहीं कर पाई। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह तैनाती इजरायल के साथ मिलकर संभावित सहयोग की तैयारी को दर्शाती है। नीचे दी गई टेबल में ऑपरेशन से जुड़े कुछ प्रमुख आंकड़े दिए गए हैं:
| तारीख | प्रमुख घटना |
|---|---|
| 24 फरवरी 2026 | 12 F-22 विमान यूनाइटेड किंगडम से इजरायल पहुंचे |
| 28 फरवरी 2026 | ऑपरेशन एपिक फ्यूरी की आधिकारिक शुरुआत हुई |
| 01 मार्च 2026 | ईरान में पहला लड़ाकू मिशन शुरू किया गया |
| 27 मार्च 2026 | रूसी पायलटों की कार्रवाई के जवाब में और विमानों की तैनाती |
इस ऑपरेशन में F-22 के साथ B-2 स्पिरिट बॉम्बर्स और EA-18G इलेक्ट्रॉनिक अटैक जेट्स ने भी तालमेल बिठाकर काम किया। अमेरिकी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि नौ दिनों के इस अभियान के दौरान ईरान ने कई मिसाइलें दागीं, लेकिन अमेरिकी विमानों को कोई नुकसान नहीं हुआ। मिडिल ईस्ट में वर्तमान में F-35 और AWACS विमानों का भी बड़ा स्थानांतरण किया जा रहा है।




