India Iran Relations: ऊर्जा संकट से बचने के लिए ईरान का साथ दे रहा भारत, अमेरिकी एक्सपर्ट ने किया बड़ा दावा
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच भारत की विदेश नीति को लेकर बड़ी बात सामने आई है। प्रसिद्ध अमेरिकी राजनीतिक वैज्ञानिक Robert Pape का कहना है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित करने के लिए धीरे-धीरे ईरान की ओर झुक रहा है। युद्ध के दूसरे महीने में प्रवेश करने के साथ ही वैश्विक स्तर पर तेल की सप्लाई और कीमतों में हो रही बढ़ोतरी ने भारत जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के लिए चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो इसका असर भारत पर काफी गहरा होगा।
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भारत के लिए क्यों जरूरी है ईरान के साथ बेहतर संबंध?
भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए खाड़ी देशों से होने वाले आयात पर बहुत अधिक निर्भर है। मौजूदा संकट को देखते हुए भारत के लिए अपने ऊर्जा हितों की रक्षा करना सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गया है। इस स्थिति को संभालने के लिए भारत कई स्तरों पर काम कर रहा है।
- Robert Pape के अनुसार, ईरान वर्तमान में दुनिया के एक बड़े तेल भंडार पर नियंत्रण रखता है।
- भारतीय नौसेना के युद्धपोत फारस की खाड़ी (Persian Gulf) में तेल के टैंकरों को सुरक्षा प्रदान कर रहे हैं।
- MEA के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया है कि भारत जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए सभी देशों के संपर्क में है।
- अमेरिका ने भारत को विकल्प के रूप में अपनी ऊर्जा सप्लाई का प्रस्ताव भी दिया है ताकि ईरान पर निर्भरता कम हो सके।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस स्थिति को वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिए चुनौतीपूर्ण बताया है।
युद्ध का असर और शांति के लिए भारत के बड़े कदम
भारत केवल मूकदर्शक नहीं बना है, बल्कि वह ओमान के साथ मिलकर इस संकट को कम करने के लिए मध्यस्थ की भूमिका भी निभा रहा है। पर्दे के पीछे से भारत लगातार शांति और कूटनीति के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, युद्ध की आंच अब प्रवासियों तक भी पहुँचने लगी है।
30 मार्च 2026 को कुवैत में एक पावर और वाटर प्लांट पर हुए हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत की दुखद खबर भी सामने आई है। इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते हमलों ने पूरे क्षेत्र में असुरक्षा का माहौल बना दिया है। Strait of Hormuz के जरिए होने वाले व्यापार को सुरक्षित रखना भारत और BRICS देशों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। भारत लगातार सभी पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए रास्ता निकालने की अपील कर रहा है ताकि खाड़ी क्षेत्र में शांति बनी रहे और ऊर्जा की आपूर्ति बाधित न हो।




