US का ईरान पर बड़ा बयान, मिसाइल और ड्रोन क्षमता खत्म करने के लिए अमेरिका ने शुरू की बड़ी कार्रवाई
अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने 30 मार्च 2026 को बड़ा बयान देते हुए कहा है कि खाड़ी क्षेत्र में स्थिरता तभी आएगी जब ईरान की मिसाइल और ड्रोन दागने की क्षमता को पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा। अमेरिका और इजरायल की सेनाएं ईरान के सैन्य ठिकानों और उसकी नौसेना को लगातार निशाना बना रही हैं। इस सैन्य कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य ईरान को भविष्य में नए मिसाइल और ड्रोन बनाने से रोकना है ताकि क्षेत्र के दूसरे देशों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
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ईरान के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई हुई है?
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के अनुसार, ईरान इस समय अपने सबसे कमजोर दौर से गुजर रहा है। ताजा सैन्य रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सेना ने ईरान के 4 बड़े बैलिस्टिक मिसाइल उत्पादन केंद्रों और 29 मिसाइल लॉन्च केंद्रों को तबाह कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन हमलों के बाद ईरान के लिए कम और मध्यम दूरी की मिसाइलें बनाना फिलहाल नामुमकिन हो गया है। अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि वह ईरान के रक्षा उद्योग को पूरी तरह पंगु बनाने की दिशा में काम कर रहा है।
क्षेत्रीय सुरक्षा और ताजा स्थिति का विवरण
इस पूरे मामले में सऊदी अरब, यूएई, बहरीन और कुवैत जैसे देशों ने ईरान की मिसाइल गतिविधियों की कड़ी निंदा की है और इसे नागरिकों के लिए बड़ा खतरा बताया है। इस तनाव के बीच हुए कुछ बड़े बदलावों और घटनाओं की जानकारी नीचे दी गई है:
| घटना | ताजा अपडेट |
|---|---|
| ट्रम्प की चेतावनी | शांति समझौता न होने पर ईरान के तेल कुओं और बिजली घरों को नष्ट करने की धमकी दी। |
| राजनयिक स्थिति | ईरान ने अमेरिका के 15 सूत्रीय युद्धविराम प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। |
| सैन्य नुकसान | ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कमांडर अलीरेजा तंगसिरी के मारे जाने की पुष्टि हुई है। |
| क्षेत्रीय हमले | बगदाद के पास एक एयर बेस और कुवैत के बिजली प्लांट पर हमले की खबरें आई हैं। |
| शिक्षा क्षेत्र | ईरान की धमकियों के बाद कुछ अमेरिकी यूनिवर्सिटी ने अपनी क्लास ऑनलाइन मोड पर शुरू की हैं। |
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने यह भी संकेत दिए हैं कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को तुरंत नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान के तेल टर्मिनलों पर कब्जा भी कर सकता है। फिलहाल अमेरिका का पूरा ध्यान ईरान की उस ताकत को खत्म करने पर है जिससे वह दूसरे देशों के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा सकता है।




