Donald Trump की ईरान को बड़ी धमकी, खारे पानी को मीठा बनाने वाले प्लांट उड़ाने का दिया अल्टीमेटम
Donald Trump ने ईरान के नागरिक ठिकानों और वहां के बुनियादी ढांचे, विशेष रूप से डिसैलिनेशन प्लांट (खारे पानी को मीठा बनाने वाले कारखाने) को निशाना बनाने की कड़ी धमकी दी है। 30 मार्च 2026 को जारी इस बयान में कहा गया है कि अगर ईरान ने अपनी हरकतों को नहीं रोका और Hormuz Strait को तुरंत नहीं खोला, तो उसके ऊर्जा और पानी के स्रोतों को पूरी तरह तबाह कर दिया जाएगा। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि पीने के पानी के स्रोतों पर हमला करना अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ है।
ट्रंप की धमकी और मौजूदा स्थिति के मुख्य बिंदु क्या हैं?
Donald Trump ने स्पष्ट किया है कि अगर जल्द ही कोई समझौता नहीं होता है, तो अमेरिका ईरान के पावर और वॉटर इंफ्रास्ट्रक्चर को पूरी तरह खत्म कर सकता है। इस तनाव के बीच क्षेत्र में कई अन्य घटनाएं भी हुई हैं जो खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं।
- Trump ने Kharg Island पर कब्जा करके ईरान का तेल जब्त करने की भी बात कही है।
- ईरान ने फिलहाल Hormuz Strait में जहाजों की आवाजाही पर कड़ी पाबंदी लगा रखी है।
- हाल ही में ईरान की ओर से किए गए एक ड्रोन हमले में कुवैत के एक पावर और डिसैलिनेशन प्लांट को नुकसान पहुंचा है।
- कुवैत में हुए इस हमले में एक कर्मचारी की जान जाने की खबर है और भारी संपत्ति का नुकसान हुआ है।
अंतरराष्ट्रीय कानून और विशेषज्ञों की इस पर क्या राय है?
मानवाधिकार संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों ने इन धमकियों को बेहद खतरनाक बताया है। पानी के प्लांट और बिजली घरों को नागरिक संपत्ति माना जाता है, जिन्हें युद्ध के दौरान निशाना बनाना जेनेवा कन्वेंशन के तहत अपराध की श्रेणी में आता है।
| संगठन/संस्था | विशेषज्ञों का कहना |
|---|---|
| International Law (IHL) | नागरिक बुनियादी ढांचे पर सीधा हमला प्रतिबंधित है। |
| Red Cross (ICRC) | जरूरी सेवाओं पर हमला सीधे तौर पर आम लोगों पर युद्ध है। | इसे रोम स्टैच्यू के तहत युद्ध अपराध माना जा सकता है। |
| Human Rights Watch | पानी के स्रोतों को नष्ट करना सामूहिक दंड के बराबर है। |
ईरान की Revolutionary Guard ने भी चेतावनी जारी की है कि अमेरिकी विश्वविद्यालयों से जुड़े लोग परिसरों से दूर रहें। हालांकि पाकिस्तान की मदद से बातचीत की खबरें आई थीं, लेकिन ईरान ने फिलहाल अमेरिका के साथ किसी भी सीधी बातचीत से इनकार किया है। खाड़ी क्षेत्र में काम करने वाले प्रवासियों के लिए यह तनाव सुरक्षा और भविष्य की योजनाओं के लिहाज से काफी संवेदनशील हो गया है।




